नीट प्रश्नपत्र लीक और सीबीएसई मूल्यांकन विवाद पर जयराम रमेश सरकार से पूछे सवाल
- DSS Admin
- May 25, 2026
नई दिल्ली, 25 मई (हि.स.)। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने नीट‑यूजी प्रश्नपत्र लीक और सीबीएसई की कक्षा 12वीं की कॉपी मूल्यांकन में कथित त्रुटियों को लेकर केंद्र सरकार का सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम पूरी तरह विफल होने का आरोप लगाया।
रमेश ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने पोस्ट में कहा कि मोदी सरकार ने फरवरी 2024 में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम संसद से पारित कराया था, लेकिन यह कानून पेपर लीक रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुआ है। विपक्ष ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यह कानून गेस पेपर और अन्य तरीकों से होने वाले पेपर लीक को रोकने में सक्षम नहीं है। नीट‑यूजी 2026 परीक्षा में प्रश्नपत्र सबसे ऊंची बोली लगाने वालों तक पहुंचाया गया और लाखों छात्रों को इसकी कीमत चुकानी पड़ी।
उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में व्यापक सुधार होना चाहिए और सरकार को प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर मूल्यांकन तक की पूरी प्रक्रिया के लिए पूरी तरह सुरक्षित प्रोटोकॉल विकसित करना चाहिए।
एक अन्य पोस्ट में रमेश ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली (ऑन‑स्क्रीन मार्किंग सिस्टम ओएसएम) को लेकर हो रहे विवाद पर कहा कि इस प्रणाली ने देशभर के लाखों छात्रों का शैक्षणिक भविष्य अस्त‑व्यस्त कर दिया है। कक्षा 12 का पास प्रतिशत अभूतपूर्व रूप से तीन प्रतिशत गिर गया है और पूरी प्रक्रिया अनियमितताओं से भरी रही है। धुंधली और अपठनीय उत्तर पुस्तिकाएं, गलत मूल्यांकन, छात्रों के साथ गलत कॉपियों का जोड़ा जाना, भुगतान में देरी और अत्यधिक पुनर्मूल्यांकन शुल्क की मांग से छात्र परेशान हैं।
रमेश ने कहा कि इन समस्याओं का पहले अनुमान क्यों नहीं लगाया गया और ओएसएम प्रणाली को अपनाने से पहले सीबीएसई और मंत्रालय ने सावधानीपूर्वक योजना क्यों नहीं बनाई। प्रधानमंत्री को जवाब देना चाहिए कि आखिर ऐसे मंत्री को, जो अपनी अक्षमता से छात्रों का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं, इतनी लंबी अवधि तक पद पर बने रहने की अनुमति क्यों दी गई।
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