मुख्यमंत्री ने अवैध खनन, ओवरलोडिंग और रेत माफिया के खिलाफ कार्रवाई के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री सहित अन्य

रांची, 03 जून (हि.स.)। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में अवैध खनन, ओवरलोडिंग और बालू माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा राज्य की अमूल्य धरोहर है और इसके संरक्षण के साथ-साथ पारदर्शी एवं प्रभावी उपयोग से राजस्व वृद्धि तथा स्थानीय लोगों के हितों को सुनिश्चित किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री बुधवार को मंत्रालय में खान एवं भू-तत्व विभाग तथा भवन निर्माण विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में विभागों की विभिन्न योजनाओं, परियोजनाओं और लंबित कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई तथा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से अवैध बालू खनन पर चिंता व्यक्त करते हुए आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी तंत्र विकसित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अवैध खनन न केवल राज्य को राजस्व का नुकसान पहुंचाता है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और कानून-व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती उत्पन्न करता है।

समीक्षा के दौरान बताया गया कि राज्य में कुल 820 बालू घाट हैं। इनमें से 376 कैटेगरी-1 घाटों पर पंचायतों के माध्यम से बालू उठाव किया जा रहा है, जबकि 444 कैटेगरी-2 घाटों में से 300 घाटों का ऑक्शन किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जिन घाटों का ऑक्शन हो चुका है, वहां शीघ्र बालू उठाव शुरू कराया जाए तथा शेष घाटों की नीलामी प्रक्रिया भी जल्द पूरी की जाए।

उन्होंने मशीनों के माध्यम से बालू उठाव पर रोक संबंधी आदेश की समीक्षा कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया। साथ ही विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन के संयुक्त अभियान चलाकर नियमित निरीक्षण एवं सघन निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।

मुख्यमंत्री ने राज्य में संचालित बीसीसीएल, सीसीएल और ईसीएल की बंद पड़ी खदानों की समीक्षा करते हुए कहा कि जहां उत्पादन बंद है, वहां उत्पादन दोबारा शुरू कराया जाए या फिर लीज निरस्तीकरण की प्रक्रिया अपनाई जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जिन खनिज ब्लॉकों का ऑक्शन हो चुका है लेकिन वे लंबे समय से निष्क्रिय हैं, उनकी समीक्षा कर आवश्यकतानुसार उन्हें निरस्त किया जाए और नए राजस्व आकलन के बाद पुनः नीलामी की जाए। इसके अलावा कार्यरत और गैर-कार्यरत खनन क्षेत्रों की मैपिंग सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में संचालित सात स्वर्ण खदानों (गोल्ड माइंस) की स्थिति की समीक्षा की। वर्तमान में इन खदानों से लगभग 20 किलोग्राम वार्षिक स्वर्ण उत्पादन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने इसे बढ़ाने की आवश्यकता बताते हुए अधिकारियों को उत्पादन में बाधा बन रही समस्याओं की पहचान कर त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने राज्य के अन्य संभावित स्वर्ण खदान क्षेत्रों के शीघ्र ऑक्शन की प्रक्रिया तेज करने पर भी बल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में स्वर्ण भंडार की पर्याप्त संभावनाएं हैं और वैज्ञानिक एवं योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर इस क्षेत्र को राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनाया जा सकता है। उन्होंने गोल्ड माइनिंग सेक्टर में तकनीकी उन्नयन, निवेश आकर्षित करने और बेहतर प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने पर विशेष ध्यान देने को कहा, ताकि राज्य के राजस्व और रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो सके।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड (जेएसएमडीसी) और झारखंड माइनिंग एंड एक्सप्लोरेशन कंपनी लिमिटेड (जेएमईसीएल) के लिए अधिक से अधिक खनिज क्षेत्र आरक्षित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इससे राज्य को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इसके अलावा जेएमईसीएल में रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति करने तथा दोनों संस्थाओं के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।

भवन निर्माण विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में चल रही सभी सरकारी भवन और अवसंरचना परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न सरकारी कार्यालयों, आवासीय परिसरों, शैक्षणिक संस्थानों और स्वास्थ्य भवनों के निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग करने और आधुनिक तथा टिकाऊ निर्माण तकनीकों को अपनाने का निर्देश दिया। साथ ही गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए नियमित तकनीकी निरीक्षण कराने पर भी बल दिया।

मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान कहा कि खनन और आधारभूत संरचना विकास दोनों ही राज्य की आर्थिक प्रगति के प्रमुख आधार हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित कर झारखंड को विकास की नई दिशा दी जा सकती है।

बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, विभागीय सचिव अरवा राजकमल, खान निदेशक राहुल कुमार सिन्हा, भूतत्व निदेशक कुमार अमिताभ सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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