गौमाता केवल एक पशु नहीं, ग्राम्य जीवन और अर्थव्यवस्था की आधारशीला : परिमल
- DSS Admin
- May 21, 2026

गौ आधारित अर्थव्यवस्था के लिए गौसेवा परिवार चला रहा विशेष निशुल्क आवासीय प्रशिक्षण
रांची, 21 मई (हि.स.)। भारत की सनातन संस्कृति में गौमाता केवल एक पशु नहीं,बल्कि ग्राम्य जीवन,कृषि,स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था की आधारशिला रही है। आज जब देश रासायनिक खेती,बढ़ते प्रदूषण, बेरोजगारी और ग्रामीण पलायन जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, तब गौआधारित ग्राम विकास एक प्रभावी और स्थायी समाधान के रूप में सामने आ रहा है।
गुरुवार को गौ सेवा परिवार के प्रशिक्षक परिमल ने बताया कि इसी उद्देश्य को लेकर गौसेवा परिवार की ओर से पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया में विशेष निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनका लक्ष्य गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाना और गांवों को गौआधारित विकास के माध्यम से समृद्ध करना है।
गौशाला स्वावलंबन का मॉडल
इस अभियान में गोभक्तों और युवाओं को गौआधारित ग्राम विकास और गौशाला स्वावलंबन का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण का मुख्य आधार है गोबर और गोमूत्र आधारित अर्थव्यवस्था।
गौशालाओं को केवल दान पर निर्भर रखने के स्थान पर उन्हें उत्पादन और सेवा आधारित केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद, कीटनाशक, औषधियां, ऊर्जा एवं ग्रामोद्योग आधारित उत्पाद तैयार कर गौशालाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
पांच आयामों पर आधारित ग्राम विकास
गोसेवा परिवार का यह अभियान ग्राम विकास के पांच प्रमुख आयामों पर आधारित है। इनमें गौ आधारित कृषि, गौ आधारित मानव चिकित्सा,गौ आधारित ऊर्जा, गौ आधारित ग्रामोदयोग और गौपालन, नस्ल सुधार एवं गोचिकित्सा शामिल हैं।
20 हजार गौशालाएं बदल सकती हैं भारत का भविष्य
गौ सेवा परिवार के प्रशिक्षक परिमल ने बताया कि देश में लगभग 20,000 गौशालाएं हैं। यदि प्रत्येक गौशाला अपने आसपास के 30 गांवों में विस्तार सेवा दे तो भारत के लगभग सभी गांव आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। गौशालाएं केवल गोसंरक्षण का केंद्र न रहकर ग्राम विकास, प्राकृतिक कृषि, स्वास्थ्य और ग्रामीण रोजगार के प्रशिक्षण केंद्र बन सकती हैं। इससे गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, किसानों की लागत घटेगी और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा। गौसेवा परिवार इस कार्य के लिए योग्य और समर्पित व्यक्तियों का आवाहन करता है कि वे इस राष्ट्रीय अभियान से जुड़कर गौमाता की सेवा के साथ-साथ राष्ट्र की समृद्धि में अपना योगदान दें।
इस योजना के अंतर्गत प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं को विभिन्न गौशालाओं में नियुक्त किया जाएगा। उनकी योग्यता एवं कार्यक्षमता के अनुसार 15 हजार से 25 हजार रुपये तक वेतन दिया जाएगा। साथ ही आवास और भोजन की व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी। यह अभियान केवल सेवा नहीं, बल्कि सेवा के साथ स्वावलंबन का मार्ग भी प्रस्तुत करता है। यदि कोई गौशाला इस अभियान से जुड़कर अपनी गौशाला को आत्मनिर्भर बनाना चाहती है और आसपास के गांवों तक गौआधारित ग्राम विकास का संदेश पहुंचाना चाहती है, तो वे भी गौसेवा परिवार से संपर्क कर सकती हैं। संस्था की ओर से प्रशिक्षित और योग्य कार्यकर्ता उपलब्ध कराए जाएंगे, जो गौशाला और गांवों में इस मॉडल को स्थापित करने में सहयोग करेंगे।
इस संबंध में गुरुवार को गौ सेवा परिवार के प्रशिक्षक परिमल ने बताया कि चाकुलिया में लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसी क्रम में आठ जून से 30 जून तक प्रशिक्षण चलेगा। प्रशिक्षण लेकर लोग गोबर-गौमूत्र के विशेषज्ञ बन जायेंगे। साथ ही 15 से 20 हजार रुपये भी कमायेंगे।
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