विभाग की लापरवाही से कुंठित हो रहे विश्वविद्यालय शिक्षक : डाॅ धन्नजय

दुमका, 06 जून (हि.स.)। एसपी कॉलेज दुमका के संस्कृत विभाग के अध्यक्ष डाॅ धन्नजय मिश्र ने झारखंड के विश्वविद्यालयों में विगत लगभग दो दशकों से कार्यरत सहायक प्राध्यापकों पदाेन्नति सहित अन्य सुविधाएं नहीं मिलने पर राज्य के शिक्षा विभाग की नीतियों पर चिंता प्रकट की है।

उन्होंने शनिवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि राज्य के विश्वविद्यालयों के सहायक प्राध्यापकोंकी स्थिति ऐसे यात्री की तरह हो गई है जो निरन्तर पथ का निर्माण करता रहा, लेकिन स्वयं कभी लक्ष्य तक नहीं पहुंच सका। 19 वर्षों का समय कोई साधारण अवधि नहीं होती। यह किसी शिक्षक के जीवन का स्वर्णिम काल होता है, जिसमें वह अपनी ऊर्जा, प्रतिभा, शोध, अध्यापन और अनुभव से उच्च शिक्षा की नींव को सुदृढ़ बनाता है।

उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य है कि झारखंड में अनेक सहायक प्राध्यापक वर्षों से सेवा देते हुए भी सेवा-नियमों की अनिश्चितता, पदोन्नति के अभाव, नियमितीकरण की जटिलताओं और प्रशासनिक उदासीनता के कारण मानसिक, आर्थिक और व्यावसायिक असुरक्षा का जीवन जीने को विवश हैं। आक्रोश इस बात का नहीं है कि समस्याएं उत्पन्न हुईं, आक्रोश इस बात का है कि समस्याओं के समाधान के लिए उत्तरदायी संस्थाएं वर्षों तक मौन बनी रहीं।

झारखंड लोक सेवा आयोग, विश्वविद्यालय प्रशासन और उच्च शिक्षा निदेशालय इन तीनों संस्थाओं के बीच समन्वयहीनता का दुष्परिणाम उन शिक्षकों को भुगतना पड़ा, जिन्होंने विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था को निरन्तर गतिशील बनाए रखा। नियुक्तियों, पदोन्नतियों, सेवा-संपुष्टि और कैरियर उन्नयन जैसी मूलभूत प्रक्रियाएं वर्षों तक फाइलों और कार्यालयों के चक्रव्यूह में उलझी रहीं।

विडम्बना यह है कि जिन शिक्षकों ने विश्वविद्यालयों की रैंकिंग बढ़ाने, शोध को गति देने, नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में अपना जीवन समर्पित किया, वही शिक्षक आज अपने ही भविष्य को लेकर असमंजस में खड़े हैं। जिनके शोधपत्र राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए, जिन्होंने सेमिनारों, कार्यशालाओं और अकादमिक गतिविधियों से संस्थानों की प्रतिष्ठा बढ़ाई, उन्हें आज भी अपने अधिकारों के लिए बार-बार निवेदन करना पड़ रहा है। यह स्थिति केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा व्यवस्था के प्रति संवेदनहीनता का भी प्रमाण है।

---------------

   

सम्बंधित खबर