पूजा स्थल अधिनियम, 1991 के बावजूद विवादित मामले सुने जा रहे हैं तो इस अधिनियम को खत्म कर देना चाहिए: महमूद मदनी

नई दिल्ली, 15 मई (हि.स.)। जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी का कहना है कि बाबरी मस्जिद का फैसला एक ऐतिहासिक फैसला था और इस फैसले को मुसलमान ने स्वीकार कर इसे भी ऐतिहासिक बना दिया था। जिस समय यह फैसला आना था उसे समय से पहले अदालत के बाहर इस मसले को हल करने के लिए कोशिश की गई थी और पूरे देश और दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश की गई थी कि बाबरी मस्जिद के बाद अब कोई अन्य मामला नहीं उठाया जाएगा। लेकिन इसके फौरन बाद बहुत सारे मामले अदालतों के जरिए उठाए गए और अदालत में इस तरह के मामले चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूजा स्थल अधिनियम 1991 के रहते हुये इस तरह के विवादित मामले अदालतों में सुने जा रहे हैं और इस पर फैसले दिए जा रहे हैं । इधर-उधर करके अदालत में विवादित मुद्दों को उठाया जा रहा है तो इस अधिनियम की क्या जरूरत है । इसे ही खत्म कर दिया जाना चाहिए।

महमूद मदनी ने जमीअत उलमा-ए-हिंद की पहल और एसएएमएलए के सहयोग से ‘बाबरी मस्जिद का फैसला और पूजा स्थल अधिनियम 1991 पर एक आलोचनात्मक विश्लेषण” विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए यह कहा। इस गोलमेज कांफ्रेंस का आयोजन कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ़ इंडिया के डिप्टी स्पीकर हाल में किया गया था। उन्होंने कहा कि इस कांफ्रेंस में जो रिपोर्ट आई है वह भी ऐतिहासिक है और इसे आने वाली नस्लों के लिए हमने तैयार कराया है ताकि लोगों को पता रहे की एक फैसला आया था और इस पर एक रिपोर्ट तैयार की गई थी।

इस मौके पर पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद का जो फैसला आया मैं समझता हूं कि वह मुसलमान के हक में था क्योंकि इस फैसले में कई बातें कही गई है जो कि मुस्लिम पक्ष के लिए एक बुनियाद बनी है। इस मौके पर प्रोफेसर फैजान मुस्तफा ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद का फैसला और आज आने वाला भोजशाला का फैसला मिलता जुलता है। उन्होंने कहा कि हालांकि भोजशाला का मामला टाइटल सूट नहीं है लेकिन फिर भी इसमें एएसआई को बहुत कुछ करने की छूट दी गई है।

इस मौके पर उपस्थित वक्ताओं के जरिए बाबरी मस्जिद और भोजशाला के शुक्रवार के फैसले पर काफी टिप्पणियां की गई है और कहा गया है कि अब भोजशाला का मामला सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में जाएगा तो इस पर मुस्लिम पक्ष की तरफ से मजबूती से लड़ाई लड़ी जाएगी ।

   

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