कोलकाता पुलिस के डॉग स्क्वाड में शामिल किए जाएंगे छह विशेष प्रशिक्षित कुत्ते
- DSS Admin
- Jun 17, 2026
कोलकाता, 18 जून (हि.स.)। कोलकाता पुलिस अपने डॉग स्क्वाड को और अधिक आधुनिक तथा प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जल्द ही दो ट्रैकर डॉग और चार विस्फोटक पहचानने वाले कुत्तों को डॉग स्क्वाड में शामिल किया जाएगा। वर्तमान में ये सभी कुत्ते मध्य प्रदेश के टेकनपुर स्थित सीमा सुरक्षा बल अकादमी में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान कुत्तों को लगभग 46 डिग्री सेल्सियस तापमान जैसी कठिन परिस्थितियों में भी तैयार किया जा रहा है, ताकि उनकी सहनशक्ति और कार्यक्षमता बढ़ाई जा सके। प्रशिक्षण जुलाई तक पूरा होने की संभावना है, जिसके बाद उन्हें कोलकाता लाया जाएगा।
पुलिस के अनुसार, वर्तमान में कोलकाता पुलिस के डॉग स्क्वाड में केवल दो ट्रैकर डॉग हैं, जो शहर की जरूरतों के मुकाबले पर्याप्त नहीं माने जा रहे। इसी कमी को दूर करने के लिए दो पिल्लों को ट्रैकर डॉग के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है, जबकि चार अन्य को विस्फोटक पहचानने वाले कुत्तों के रूप में तैयार किया जा रहा है।
प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे छह पिल्लों में चार लैब्राडोर और दो कॉकर स्पैनियल नस्ल के कुत्ते शामिल हैं। इन्हें अपराध जांच, सुरक्षा व्यवस्था और विस्फोटक पदार्थों की पहचान जैसे विभिन्न कार्यों के लिए विशेष रूप से तैयार किया जा रहा है।
कोलकाता पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान डॉग स्क्वाड में अधिकांश कुत्ते विस्फोटक पदार्थों का पता लगाने के लिए प्रशिक्षित हैं। इनका उपयोग मुख्य रूप से विशिष्ट व्यक्तियों की आवाजाही से पहले क्षेत्रों की सुरक्षा जांच के लिए किया जाता है।
वहीं, ट्रैकर डॉग अपराध जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये अपराध स्थल पर मौजूद गंध के आधार पर संदिग्धों के भागने के रास्ते का पता लगाने और उनकी तलाश में पुलिस की मदद करते हैं। हत्या, डकैती तथा अन्य गंभीर अपराधों की जांच में इनकी भूमिका काफी अहम मानी जाती है।
अधिकारियों के अनुसार, यदि अपराधी घटनास्थल पर कोई वस्तु छोड़ जाते हैं, तो ट्रैकर डॉग उसकी गंध के आधार पर सुराग जुटाने में मदद कर सकते हैं। इसी तरह किसी संदिग्ध वस्तु की सूचना मिलने पर विस्फोटक पहचानने वाले कुत्तों की सहायता ली जाती है।
पुलिस का मानना है कि नए प्रशिक्षित कुत्तों के शामिल होने से अपराध जांच की क्षमता बढ़ेगी और सुरक्षा व्यवस्था को भी अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा।

