लेह में बुधवार को हुई हेलीकॉप्टर दुर्घटना में सेना के ३ अधिकारी बाल-बाल बचे
- DSS Admin
- May 23, 2026
लेह, 23 मई (हि.स.)। लेह के पास पहाड़ी तांगस्ते क्षेत्र में एक चीता हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसमें सेना के तीन अधिकारी बाल-बाल बच गए।बुधवार को हुई यह घटना की जानकारी सेना की तरफ से आज दी गई।
जानकारी के अनुसार एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक मेजर सिंगल-इंजन हेलीकॉप्टर उड़ा रहे थे और उनके साथ तीसरी इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल सचिन मेहता भी सवार थे।
अधिकारियों ने बताया कि हेलीकॉप्टर में सवार तीनों लोगों को मामूली चोटें आईं और उन्होंने इस घटना को किसी चमत्कार से कम नहीं बताया। उन्होंने यह भी कहा कि दुर्घटना के कारणों की जांच जारी है।
इस बीच अधिकारियों ने बताया कि भारतीय सेना एक-दो साल में अपने पुराने चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों के बेड़े को चरणबद्ध तरीके से हटाना शुरू कर देगी और अगले आठ से दस वर्षों में उन्हें नए हल्के उपयोगिता हेलीकॉप्टरों से बदल देगी। यह सेना विमानन कोर के आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है।
सेना की योजनाबद्ध दोहरी प्रतिस्थापन रणनीति में स्थानीय स्तर पर उत्पादित हल्के उपयोगिता हेलीकॉप्टरों को शामिल करना और महत्वपूर्ण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अस्थायी तौर पर समान हेलीकॉप्टरों को पट्टे पर लेना शामिल है। सेना को लगभग 250 नए हेलीकॉप्टरों की आवश्यकता है।
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) जिसने रक्षा सेवाओं में उपयोग के लिए 625 चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों का लाइसेंस-उत्पादन किया था, अब इनका निर्माण नहीं करती है लेकिन इनके रखरखाव और मरम्मत के लिए जिम्मेदार है।
वर्तमान में चीता और चेतक हेलीकॉप्टर सियाचिन ग्लेशियर सहित उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन रेखा बने हुए हैं। हाल ही में हुई कई दुर्घटनाओं के कारण इन हेलीकॉप्टरों के सुरक्षा रिकॉर्ड की गहन जांच शुरू हो गई है। पिछले 10-12 वर्षों में 15 से अधिक चीता और चेतक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं जिनमें कई पायलटों की जान चली गई है। अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा बेड़ा उड़ान भरने योग्य है और तकनीकी रूप से कुछ वर्षों तक चल सकता है।
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