मध्य प्रदेश 7.63 लाख से अधिक बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण कर देश के शीर्ष राज्यों में हुआ शामिल
- DSS Admin
- Jun 08, 2026
भोपाल, 08 जून (हि.स.)। महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से प्रारंभ किए गए देशव्यापी एचपीवी(ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान में मध्य प्रदेश शीर्ष राज्यों में शामिल हो गया है। स्वास्थ्य अमले, सहयोगी विभागों की प्रतिबद्धता एवं सतत मॉनिटरिंग के परिणामस्वरूप प्रदेश में 7.63 लाख से अधिक पात्र बालिकाओं का सफलतापूर्वक एचपीवी टीकाकरण किया जा चुका है।
प्रदेश के उप मुख्यमंत्री तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश ने एचपीवी टीकाकरण अभियान में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर यह सिद्ध कर दिया है कि जनभागीदारी, स्वास्थ्य अमले की प्रतिबद्धता और प्रभावी नेतृत्व के बल पर बड़े से बड़े जनस्वास्थ्य अभियानों को समय से पहले सफल बनाया जा सकता है।
उन्होंने अभियान से जुड़े चिकित्सकों, नर्सिंग स्टॉफ, आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, एएनएम, शिक्षकों, जिला प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें सफलता के लिये बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह अभियान प्रदेश की बेटियों को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाकर सुरक्षित भविष्य देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 28 फरवरी 2026 को महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से देशव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया गया था। यह अभियान मूल रूप से 90 दिनों के लिए निर्धारित था, लेकिन मध्य प्रदेश ने निर्धारित लक्ष्य को मात्र 60 दिनों में ही पूर्ण कर लिया, जो प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की दक्षता और प्रभावी क्रियान्वयन का उत्कृष्ट उदाहरण है।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे सामान्य कैंसर है तथा इसके अधिकांश मामलों का प्रमुख कारण एचपीवी संक्रमण होता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह ऐसा कैंसर है, जिसे प्रभावी टीकाकरण के माध्यम से काफी हद तक रोका जा सकता है। एचपीवी वैक्सीन बालिकाओं को भविष्य में इस गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करने का सुरक्षित, प्रभावी एवं वैज्ञानिक उपाय है।
अभियान की सफलता में स्वास्थ्य विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तथा अभिभावकों की सक्रिय सहभागिता रही। प्रदेश के सभी जिलों में व्यापक जनजागरूकता, सूक्ष्म कार्ययोजना (माइक्रो प्लानिंग) एवं सतत मॉनिटरिंग के माध्यम से यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है।
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