पाकिस्तान से जुड़े कथित आतंकी नेटवर्क के तार, पूछताछ में सामने आई एफपीआई की साजिश

भोपाल, 22 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आतंकवादी निरोधक दस्ता (एटीएस) द्वारा पकड़े गए कथित आतंकी मॉड्यूल की जांच में कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसी की पूछताछ में बिहार के मधुबनी से पकड़े गए इजहार उल हक ने बताया कि वह और पाकिस्तानी टेरर ग्रुप से जुड़े अन्य लोग ‘मिशन 2047’ के लिए काम कर रहे थे।

एटीएस के अनुसार, इसका मकसद भारत में तख्ता पलट कर पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) के एजेंडे को साल 2047 तक देश में लागू करना है। पूछताछ में इजहार ने बताया कि देशभर में तैयार हो रहे उनके कथित मुजाहिद्दीन समय आने पर एक साथ बाहर आएंगे और शासन को उखाड़ फेंकेंगे। यह भरोसा उन्हें पाकिस्तानी हैंडलर्स ने दिलाया था। उन्हें शपथ दिलाई गई थी कि समय आने पर उन्हें टारगेट किलिंग और देश में डर का माहौल पैदा करने जैसे काम करने होंगे।

14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया इजहार

इजहार की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद सोमवार को उसे विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इससे पहले एटीएस ने उससे लगातार पूछताछ कर नेटवर्क की गतिविधियों और संपर्कों की जानकारी जुटाई।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश एटीएस ने पाकिस्तानी हैंडलर से कथित संपर्क रखने वाले मदरसा शिक्षक इजहार-उल-हक को बिहार के मधुबनी जिले से गिरफ्तार किया था। ट्रांजिट रिमांड पर भोपाल लाकर उससे पूछताछ की गई। सोमवार को रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

जांच एजेंसियों के अनुसार, इजहार-उल-हक पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिम कार्ड खरीदकर उन्हें नेपाल के रास्ते पाकिस्तानी हैंडलरों तक पहुंचाने का आरोप है। एटीएस के मुताबिक उत्तर भारत में कथित तौर पर नया आतंकी मॉड्यूल तैयार करने के मामले में अब तक पांच राज्यों से छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है और मामले की जांच जारी है।

पाकिस्तानी संपर्कों की जांच में जुटी एजेंसी

जांच के दौरान एटीएस को कथित तौर पर ऐसे इनपुट मिले हैं कि कुछ संदिग्ध विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में थे। एजेंसी अब यह जांच कर रही है कि इन संपर्कों के जरिए किस तरह की गतिविधियां संचालित की जा रही थीं और इसमें अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।

फराज से पूछताछ में सोशल मीडिया नेटवर्क का खुलासा

भोपाल से जुड़े संदिग्ध फराज से पूछताछ में भी कई जानकारियां सामने आने की बात कही जा रही है। जांच के मुताबिक वह कथित तौर पर कुछ ऑनलाइन ग्रुप्स से जुड़ा था और अन्य लोगों को जोड़ने की कोशिश कर रहा था।

एटीएस के अनुसार, फराज पिछले कुछ वर्षों से कुछ लोगों के संपर्क में था, जिनके माध्यम से कथित तौर पर विदेशी संपर्कों तक पहुंच बनाई गई। जांच एजेंसी इन सभी कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई है।

वीडियो कॉल और ऑनलाइन ग्रुप्स की भी जांच

एटीएस की जांच में टेलीग्राम और वॉट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय ग्रुप्स की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। एजेंसी अब इन डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है। पूछताछ में यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि संदिग्धों को किस तरह प्रभावित किया गया, उन्हें कौन-कौन से निर्देश दिए गए और कथित नेटवर्क की वास्तविक भूमिका क्या थी।

कमरे से मिले सामान की जांच जारी

एटीएस ने दबिश के दौरान बरामद डिजिटल और अन्य सामग्री को जांच के लिए भेजा है। एजेंसी का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही नेटवर्क की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।

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