कोंकण के दक्षिणी हिस्से में मानसून की दस्तक, जल्द पूरे महाराष्ट्र में पहुंचेगा

मुंबई, 06 जुन (हि.स.)। महाराष्ट्रवासियों का मानसून को लेकर इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। शनिवार को मानसून ने दक्षिण कोंकण के रास्ते महाराष्ट्र में प्रवेश कर लिया। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि मानसून की आगे की प्रगति के लिए मौसम की परिस्थितियां अनुकूल हैं और जल्द ही यह मुंबई सहित राज्य के अन्य हिस्सों में भी पहुंच सकता है। इससे भीषण गर्मी से परेशान लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के कुछ इलाकों में बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है और तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। मानसून के आगे पहुंचने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं। इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य समय से तीन दिन देरी से, यानी 4 जून को केरल पहुंचा था। इसके बाद यह तेजी से उत्तर दिशा की ओर बढ़ा और 5 जून को कर्नाटक, तमिलनाडु तथा बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों के कुछ और क्षेत्रों में आगे बढ़ गया है। इसी दौरान मानसून अरब सागर के कुछ हिस्सों और गोवा के कई क्षेत्रों तक भी पहुंच गया था, जिससे महाराष्ट्र में इसके जल्द प्रवेश की संभावना जताई जा रही थी।

इसी क्रम में शनिवार को मानसून ने पूरे गोवा क्षेत्र को कवर करते हुए महाराष्ट्र के दक्षिण कोंकण में दस्तक दे दी है। पिछले कुछ सप्ताहों से राज्य के कई हिस्से, विशेषकर विदर्भ, भीषण गर्मी और लू जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहे थे। बीच-बीच में हुई आंधी और बारिश से लोगों को कुछ राहत मिली, लेकिन सभी की निगाहें मानसून के आगमन पर टिकी थीं।

अब मानसून के राज्य में प्रवेश करने के बाद अगले कुछ दिनों में इसके पूरे महाराष्ट्र में फैलने का अनुमान है। आमतौर पर दक्षिण कोंकण में पहुंचने के बाद मानसून तेजी से आगे बढ़ते हुए मुंबई और उत्तर कोंकण तक पहुंच जाता है। इसलिए मुंबई में भी जल्द मानसून के आगमन की संभावना जताई जा रही है।

पिछले वर्ष मानसून 24 मई को केरल पहुंचा था और 25 मई को दक्षिण कोंकण तथा 26 मई को मुंबई में प्रवेश कर गया था। इस वर्ष यह 4 जून को केरल पहुंचा और मात्र 24 घंटों के भीतर गोवा तक पहुंच गया। इसके बाद अब इसने दक्षिण कोंकण में भी दस्तक दे दी है।

हालांकि मौसम विभाग ने जून महीने में सामान्य से कम वर्षा होने का अनुमान जताया है। ऐसे में मानसून की आगे की गति और राज्य में वर्षा के वितरण पर नागरिकों के साथ-साथ किसानों की भी नजर बनी हुई है।

----------------------

   

सम्बंधित खबर