महाराष्ट्र-दक्षिण कोरिया की साझेदारी, कौशल विकास को मिलेगा बल

मुंबई, 21 मई (हि.स.)। महाराष्ट्र सरकार ने दक्षिण कोरिया के साथ तीन समझौते किए हैं। इसके माध्यम से कोरिया की उत्कृष्ट कौशल प्रणाली और उन्नत तकनीक भारत में आएगी, जिसका सीधा लाभ भारतीय विद्यार्थियों को मिलेगा। इन समझौतों के माध्यम से बुनियादी औद्योगिक कौशल से लेकर उच्च स्तरीय उन्नत कौशल तक सभी स्तरों पर प्रशिक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में गुरुवार को सह्याद्री अतिथिगृह में तीन एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। कौशल विकास विभाग व दक्षिण कोरिया के कोरिया पॉलिटेक्निक्स, महाराष्ट्र राज्य कौशल विकास संस्था, दक्षिण कोरिया के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर लाइफलॉन्ग एजुकेशन, रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय तथा दक्षिण कोरिया की प्रतिष्ठित संस्थाओं की दो शाखाओं के बीच समझौते किए गए।

इस अवसर पर कौशल मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, विभाग की अपर मुख्य सचिव मनीषा वर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की जनसंख्या और युवा पीढ़ी की नवाचार क्षमता का उपयोग देश के विकास के लिए कौशल विकास विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। भारत को विशाल भौगोलिक और जनसंख्या का लाभ प्राप्त है। देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है और यही वर्ग हमारी सबसे बड़ी ताकत है। इस वर्ग की नवाचार क्षमता को ‘मानव संसाधन’ में परिवर्तित करना हमारा मुख्य उद्देश्य है।

महाराष्ट्र देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन है। राज्य की अर्थव्यवस्था वर्तमान में 660 अरब डॉलर की है और इसे जल्द ही 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को सभी स्तरों पर उत्कृष्ट कौशलयुक्त मानव संसाधन की आवश्यकता है। यह अंतरराष्ट्रीय कौशल समझौता महाराष्ट्र की आर्थिक प्रगति को नई गति देगा। यह समझौता केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जल्द ही इसे व्यवहार में उतारा जाएगा। इस ऐतिहासिक सहयोग से उद्योगों को कुशल मानवबल मिलेगा और भारतीय युवाओं के लिए वैश्विक स्तर पर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे।

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