महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर को दक्षिण और मध्य एशिया के बीच प्रवेश द्वार के रूप में बताया
- DSS Admin
- Jul 01, 2026
श्रीनगर, 01 जुलाई (हि.स.)। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बुधवार को केंद्र सरकार से जम्मू और कश्मीर की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति का उपयोग पाकिस्तान और चीन के साथ संबंधों को मजबूत करने, सार्क के माध्यम से क्षेत्रीय सहयोग को पुनर्जीवित करने और केंद्र शासित प्रदेश को दक्षिण एशिया और मध्य एशिया को जोड़ने वाले प्रवेश द्वार में बदलने का आह्वान किया।
घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए मुफ्ती ने कहा कि देश भूगोल का उपयोग रणनीतिक लाभ के रूप में तेजी से कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्व की स्थिति बदल रही है। आपने देखा कि कैसे ईरान ने अपनी रणनीतिक स्थिति का उपयोग करके संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश को भी दबाव में ला दिया। जम्मू और कश्मीर की भी अपनी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति है।
उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर को लेकर भारत-पाकिस्तान के लंबे विवाद ने इस क्षेत्र को अपनी आर्थिक और रणनीतिक क्षमता का एहसास करने से रोक रखा है।
उन्होंने कहा कि पीडीपी ने हमेशा सुलह की वकालत की है। जम्मू और कश्मीर एक युद्धक्षेत्र बन गया है, इसे दोनों देशों के बीच शांति का सेतु बनना चाहिए। लोगों के बीच संपर्क, संवाद और खुले रास्ते होने चाहिए।
आरएसएस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा संवाद के पक्ष में दिए गए हालिया बयानों का स्वागत करते हुए मुफ्ती ने कहा कि मोहन भगवत और दत्तात्रेय होसबले सहित नेताओं द्वारा जुड़ाव और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की बात करने से उन्हें प्रोत्साहन मिला है। उन्होंने भारत के पड़ोसियों के प्रति पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दृष्टिकोण का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि किसी प्रधानमंत्री की विरासत इस बात से नहीं मापी जाती कि वह कितने शक्तिशाली थे या कितने समय तक पद पर रहे बल्कि इस बात से मापी जाती है कि उन्होंने कितने संघर्षों का समाधान किया।
मुफ्ती ने तर्क दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के पास वर्तमान में द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने और क्षेत्रीय सहयोग को पुनर्जीवित करने का अवसर है। उन्होंने सार्क के पुनरुद्धार का आह्वान करते हुए कहा कि भारत को नेतृत्व करना चाहिए और जम्मू-कश्मीर को क्षेत्रीय निवेश और सहयोग का केंद्र बनाना चाहिए। संपर्क पर जोर देते हुए मुफ्ती ने सवाल उठाया कि जब उत्तराखंड में लिपुलेख मार्ग हाल ही में खोला गया है तो लद्दाख को खोतान, यारकंद और काशगर जैसे ऐतिहासिक व्यापार केंद्रों से जोड़ने वाले मार्ग अभी भी बंद क्यों हैं।
मुफ्ती ने केंद्र सरकार के अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 और 35ए को निरस्त करने के फैसले की भी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि यह क्षेत्र में राजनीतिक असंतोष को दूर करने में विफल रहा है।
2019 में भाजपा ने अनुच्छेद 370 और 35ए को निरस्त करके जम्मू और कश्मीर के खिलाफ अपना सबसे शक्तिशाली हथियार इस्तेमाल किया। फिर भी कोई ठोस उपलब्धि हासिल नहीं हुई है। आज भी जम्मू और कश्मीर के लोग खुद को अलग-थलग महसूस करते हैं।
उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश की वर्तमान स्थिति का वर्णन करते हुए मुफ्ती ने आरोप लगाया कि इस क्षेत्र को एक खुली जेल में बदल दिया गया है जहाँ लोगों को बोलने या शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की स्वतंत्रता नहीं है।
उन्होंने आगे तर्क दिया कि पाकिस्तान और चीन दोनों के साथ संबंधों में सुधार से जम्मू और कश्मीर की रणनीतिक क्षमता का द्वार खुलेगा और भारत को मजबूती मिलेगी।
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