सेशेल्स के सिविल सेवकों को सुशासन, नीति निर्माण का प्रशिक्षण

नई दिल्ली, 12 मई (हि.स.)। सेशेल्स के सिविल सेवकों को सुशासन, नीति निर्माण, तकनीकी नवाचार और न्यायिक सुधार जैसे विषयों पर प्रशिक्षण देने के लिए मसूरी स्थित राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) में क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 29 वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए जिनमें रक्षा, वित्त, शिक्षा, न्यायपालिका और राष्ट्रपति कार्यालय के अधिकारी भी हैं।

केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय ने बताया कि यह दो सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम 11 से 22 मई तक मसूरी और नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। इसी साल फरवरी में भारत और सेशेल्स के बीच हुए समझौते के तहत तीन वर्षों में 250 सिविल सेवकों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता एनसीजीजी के महानिदेशक डॉ. सुरेंद्रकुमार बगड़े ने की। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम अधिकारियों की पेशेवर जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया है और इसका उद्देश्य उन्हें उच्च प्रभाव वाले राष्ट्रीय कार्यक्रमों को लागू करने की क्षमता प्रदान करना है।

प्रतिनिधिमंडल प्रमुख एलेक्स हेंडरसन ने भारत सरकार का आभार जताते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण न केवल क्षमता निर्माण को बढ़ाएगा बल्कि द्विपक्षीय संबंधों को भी मजबूत करेगा। भारत और सेशेल्स के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को यह कार्यक्रम और गहरा करेगा।

कार्यक्रम समन्वयक डॉ. बीएस बिष्ट ने बताया कि प्रशिक्षण में सुशासन के सिद्धांत, नीति निर्माण, तकनीकी नवाचार, न्यायिक सुधार, ई‑कोर्ट्स, सरकारी खरीद में पारदर्शिता, एआई आधारित सुशासन, पीएम गति शक्ति और प्रशासनिक नैतिकता जैसे विषय शामिल हैं। दूसरे चरण में प्रतिभागियों को विभिन्न संस्थानों का दौरा कराया जाएगा ताकि उन्हें व्यवहारिक अनुभव भी मिल सके।

उल्लेखनीय है कि एनसीजीजी अब तक 52 देशों के 5500 से अधिक सिविल सेवकों को प्रशिक्षित कर चुका है। इनमें श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार, केन्या, तंजानिया, ट्यूनीशिया, गाम्बिया, मालदीव और अन्य अफ्रीकी एवं लैटिन अमेरिकी देशों के अधिकारी शामिल हैं।

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