उत्तर कोरिया ने नए डिस्ट्रॉयर से रणनीतिक क्रूज़ मिसाइल का किया परीक्षण
- DSS Admin
- Jul 05, 2026
सियोल/प्योंगयांग, 05 जुलाई (हि.स.)। उत्तर कोरिया के राष्ट्रपति किम जोंग-उन ने नए 5,000 टन वजनी व 140 मीटर लंबे बहुउद्देशीय नौसैनिक डिस्ट्रॉयर 'कांग कोन' से रणनीतिक क्रूज़ मिसाइल और अन्य हथियार प्रणालियों के परीक्षण का निरीक्षण किया। राष्ट्रपति ने युद्धपोत को दो महीने के भीतर नौसेना में शामिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही 10,000 टन क्लास वाले नए स्ट्रेटेजिक युद्धपोतों को भी जल्द लॉन्च करने का वादा किया है।
दक्षिण कोरिया की सरकारी समाचार योनहाप न्यूज व ईरान की सरकारी समाचार प्रेस टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को हुए परीक्षणों में रणनीतिक क्रूज मिसाइल, नौसैनिक तोपें, ऑटोमैटिक गन और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर) प्रणालियों का सफल परीक्षण किया गया। उत्तर कोरिया का कहना है कि इन परीक्षणों का उद्देश्य युद्ध की स्थिति में डिस्ट्रॉयर पर मौजूद विभिन्न हथियार प्रणालियों के संचालन और उनकी प्रभावशीलता की पुष्टि करना था।
किम जोंग-उन ने देश की युद्ध निरोधक क्षमता और सैन्य ताकत को और मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि उत्तर कोरिया अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन और अधिक स्पष्ट कार्रवाइयों के जरिए करेगा।
वहीं, दक्षिण कोरियाई सेना ने रविवार को कहा कि उसने शुक्रवार को उत्तर कोरिया द्वारा ईस्ट सी (जापान सागर) की दिशा में क्रूज़ मिसाइल परीक्षण का पता लगाया था। सियोल और वाशिंगटन के सैन्य विशेषज्ञ इन परीक्षणों से जुड़े तकनीकी पहलुओं का विश्लेषण कर रहे हैं।
उत्तर कोरिया के सरकारी टीवी द्वारा जारी फुटेज में कई क्रूज़ मिसाइलों को क्रमवार लॉन्च होते हुए दिखाया गया। 'कांग कोन' डिस्ट्रॉयर को पिछले वर्ष लॉन्च किया गया था। शुरुआती लॉन्चिंग प्रयास के दौरान युद्धपोत पलट गया था, जिसके बाद उसमें सुधार कर दोबारा सफल परीक्षण किए गए।
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षण में इस्तेमाल की गई मिसाइलें उत्तर कोरिया की 'हवासल' श्रृंखला की क्रूज़ मिसाइलें हो सकती हैं। चूंकि प्योंगयांग इन्हें रणनीतिक हथियार बता रहा है इसलिए माना जा रहा है कि इनमें परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता भी हो सकती है।
किम जोंग-उन पहले ही दावा कर चुके हैं कि 'कांग कोन' में एंटी-एयरक्राफ्ट, एंटी-शिप, एंटी-सबमरीन और एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताएं मौजूद हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि यह युद्धपोत परमाणु क्षमता वाली रणनीतिक क्रूज़ मिसाइलों और टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइलों को दागने में सक्षम है।
उत्तर कोरिया ने हाल ही में अपने एक अन्य 5,000 टन वजनी डिस्ट्रॉयर 'चो ह्योन' को भी नौसेना में शामिल किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्योंगयांग पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में 'चो ह्योन' और पूर्वी समुद्री क्षेत्र में 'कांग कोन' की तैनाती के जरिए अपनी समुद्री परमाणु क्षमता को मजबूत करना चाहता है।
कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल यूनिफिकेशन के सीनियर रिसर्चर होंग मिन ने कहा कि 9 सितंबर को देश की स्थापना की 78वीं वर्षगांठ के अवसर पर 'कांग कोन' को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल कर सकता है।
उत्तर कोरिया का कहना है कि दक्षिण कोरिया और अमेरिका की लगातार उकसावे वाली कार्रवाइयों ने इस इलाके को परमाणु युद्ध के कगार पर पहुंचा दिया है। वहीं, दक्षिण कोरिया और अमेरिका, उत्तर कोरिया के मिसाइल और हथियार कार्यक्रमों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
दोनों कोरियाई देशों के बीच 1950-53 का युद्ध, शांति संधि के बजाय युद्धविराम पर समाप्त हुआ था इसलिए तकनीकी रूप से दोनों देश अब भी युद्ध की स्थिति में माने जाते हैं।-----------------

