प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत की स्मृति में सारस्वत समारोह आयोजित

पूर्णिया, 08 जून (हि.स.)। छायावाद के प्रमुख स्तंभ एवं प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत की स्मृति में कला भवन साहित्य विभाग द्वारा मासिक संगोष्ठी के अंतर्गत सारस्वत समारोह का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व विभागाध्यक्ष दर्शनशास्त्र विभाग पूर्णिया विश्वविद्यालय प्रो. विजया रानी ने की। मुख्य अतिथि डॉ. शिवमुनि यादव तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. कामेश्वर पंकज, डॉ. प्रभात नारायण झा एवं यमुना प्रसाद बसाक उपस्थित रहे।

साहित्य विभाग की संयोजिका डॉ. निरुपमा राय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए पंत को अमर साहित्यकार बताते हुए कहा कि उनकी कृति ‘चिदंबरा’ पर उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ तथा साहित्य और संस्कृति में उनका योगदान अविस्मरणीय है।

वक्ताओं ने पंत के व्यक्तित्व एवं कृतित्व, छायावाद, प्रकृति चित्रण और मानवीय संवेदनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रो. विजया रानी ने पंत को प्रकृति का सुकुमार कवि बताते हुए उनकी रचनाओं की समीक्षा की, जबकि डॉ. कामेश्वर पंकज ने छायावाद और पंत के प्रकृति-मानवीकरण की विशेषताओं पर चर्चा की।

द्वितीय सत्र में स्थानीय कवियों ने प्रकृति आधारित कविताओं का पाठ कर समारोह को साहित्यिक ऊंचाई प्रदान की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, शिक्षाविद एवं स्थानीय कवि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन डॉ. निरुपमा राय ने किया।

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