जेनजी आंदोलन पर मानवाधिकार आयोग की सिफारिश के खिलाफ अदालत जायेंगे ओली
- DSS Admin
- Jun 05, 2026
काठमांडू, 05 जून (हि.स.)। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाले नेपाल के विपक्षी दल यूएमएल (एमाले) ने जेनजी आंदोलन मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सिफारिशों के खिलाफ अदालत जाने का फैसला लिया है।
जेनजी आंदोलन के दौरान गत वर्ष 8 और 9 सितंबर को हुई घटनाओं की जांच के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने घटना में दोषी पाए गए व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की थी। इस पर शुक्रवार को पार्टी के महासचिव शंकर पोखरेल ने आयोग की सिफारिशों पर असंतोष व्यक्त किया। पार्टी ने कहा कि आयोग की रिपोर्ट तथ्यात्मक, कानूनी और विश्लेषणात्मक दृष्टि से गंभीर प्रश्नों के घेरे में है।
यूएमएल ने विशेष रूप से पूर्व प्रधानमंत्री ओली, पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक तथा अन्य व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की आयोग की सिफारिश पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट तत्कालीन प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और संचार मंत्री की प्रत्यक्ष भूमिका, प्रत्यक्ष आदेश अथवा किसी प्रकार की आपराधिक जिम्मेदारी स्थापित करने में असफल रही है। इसके बावजूद रिपोर्ट राजनीतिक निष्कर्षों की ओर झुकते हुए कार्रवाई की सिफारिश करती दिखाई देती है, जो अपने आप में गंभीर विरोधाभास और औचित्यहीन है।
पार्टी का कहना है कि रिपोर्ट के कुछ निष्कर्ष और सिफारिशें भविष्य में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से नियंत्रित करने के लिए नजीर के रूप में इस्तेमाल किए जाने का जोखिम पैदा करती हैं। यूएमएल ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का समाधान राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से खोजा जाना चाहिए। कानूनी तंत्र को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए। यदि प्रमाण और कानून के बजाय राजनीतिक व्याख्याओं के आधार पर कार्रवाई की परंपरा शुरू होती है, तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता कमजोर हो सकती है।
पार्टी ने आयोग के समक्ष औपचारिक आपत्ति दर्ज कराने तथा रिपोर्ट की पुनर्समीक्षा की मांग करने की भी घोषणा की है। साथ ही कहा है कि यदि संवैधानिक प्रश्न उत्पन्न होते हैं तो न्यायिक पुनरावलोकन के लिए अदालत का रुख किया जाएगा और आवश्यक होने पर उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों का उपयोग किया जाएगा। यूएमएल ने आयोग की रिपोर्ट और उससे संबंधित सिफारिशों के संवैधानिक, कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं का गहन अध्ययन करने के लिए कानूनी विशेषज्ञों और विषय विशेषज्ञों का एक अध्ययन समूह गठित करने की भी घोषणा की है।
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