वेद मार्ग अपनाने से ही समाप्त होते हैं राग, द्वेष और क्रोध के दोष-स्वामी राम स्वरूप जी

Only by following the path of Vedas can the defects of attachment, hatred and anger be eliminated - Swami Ram Swarup Ji


कठुआ, 02 जून । वेद मन्दिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 52वें दिन योगाचार्य स्वामी राम स्वरूप जी ने अथर्ववेद काण्ड 2 सूक्त 24 के माध्यम से जिज्ञासुओं को महत्वपूर्ण आध्यात्मिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि परमेश्वर द्वारा प्रदत्त वेद ज्ञान ही मनुष्य के भीतर के राग-द्वेष, काम, क्रोध, मद और लोभ जैसे दोषों को समाप्त करने का एकमात्र साधन है। वेदों के मार्ग पर चलकर ही मनुष्य हिंसा और बुरी प्रवृत्तियों से मुक्त हो सकता है।

स्वामी जी ने कहा कि वेदों में स्पष्ट उल्लेख है कि हिंसा और अनैतिकता को बढ़ावा देने वाले अंततः स्वयं उसका परिणाम भुगतते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जो समाज या देश हिंसा और आतंक को बढ़ावा देते हैं, वही एक दिन उसके शिकार बनते हैं। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे क्रोध, लूट-खसोट और कुटिल प्रवृत्तियों का त्याग कर वैदिक साधना, योगाभ्यास, यज्ञ और अग्निहोत्र को अपनाएं। ऐसा करने से व्यक्ति न केवल स्वयं का बल्कि पूरे समाज का कल्याण कर सकता है और परिवार सहित सुखमय जीवन व्यतीत कर सकता है।

---------------

   

सम्बंधित खबर