परंपरा तोड़कर विवाह में मौर सोपने वाली पार्वती साहू सम्मानित

कार्यक्रम में न्याय का इंतजार पुस्तक का विमोचन किया गया

धमतरी, 18 मई (हि.स.)। धमतरी जिले के कुरुद ब्लाक के ग्राम गोजी की पार्वती साहू ने सामाजिक परंपराओं से अलग हटकर अपने पुत्र के विवाह में स्वयं मौर सौंपकर नारी सम्मान और अधिकार का प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। विधवा होने के बावजूद सामाजिक बंधनों को तोड़ते हुए निभाई गई इस भूमिका के लिए उन्हें एससी एसटी ओबीसी अल्पसंख्यक समाज द्वारा छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर में साेमवार काे आयोजित पुरखा के सुरता कार्यक्रम में सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर लेखक एवं शिक्षाविद विनोद कुमार कोसले की पुस्तक न्याय का इंतजार का विमोचन रायपुर संभाग के कमिश्नर महादेव कावरे तथा सतनामी समाज जिला धमतरी के अध्यक्ष भाव सिंह डहरे ने किया। कार्यक्रम में सामूहिक रूप से संविधान की उद्देशिका का वाचन किया गया।

कार्यक्रम में 10वीं और 12वीं में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले तथा नवोदय विद्यालय में चयनित विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। सामाजिक कार्यकर्ता एवं साहित्यकार पंडित शंकर दादा को सम्मानित किया गया। वहीं नशामुक्ति और सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन में सक्रिय ग्राम नवागांव थूहा, बंगोली, उमरदा नवागांव सहित विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।

विनोद कोसले ने कहा कि युवाओं को यूपीएससी चयनित डायमंड ध्रुव जैसे व्यक्तित्वों से प्रेरणा लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, आईएएस और आईपीएस जैसे पदों तक पहुंचने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही सम्मान और ऊंचे पद प्राप्त करने का सबसे बड़ा माध्यम है।मुख्य अतिथि महादेव कावरे ने कहा कि शिक्षा विकास का मूल मंत्र और सामाजिक प्रगति की मजबूत नींव है। भाव सिंह डहरे ने सामाजिक एकीकरण को बढ़ावा देने तथा मितानी प्रथा जैसी सामाजिक परंपराओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में देवलाल भारती, एस गावस्कर, अश्वनी बंजारा, एसएल मात्रे, अनिल बनज, स्नेहा लता हुमने, अमन हुमने, जीआर बंजारे ज्वाला, सुशीला देवी वाल्मीकि, पालनहार मेश्राम, जेएल ध्रुव, गेवाराम नेताम, मीणा कुर्रे, एमएल बघेल, नंदकुमार ध्रुव, रविंद्र साहू, कृषि वैज्ञानिक सर खरे और संतोष जांगड़े सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन शैलेश कुर्रे विद्रोही और नालेश कुर्रे ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन रूपेंद्र बघेल ने किया।

   

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