दुर्ग जिला अस्पताल में सिकलिन पीड़ित की मौत के मामले में चार संविदा कर्मचारी बर्खास्त

दुर्ग, 29 जून (हि.स.)। दुर्ग जिला अस्पताल में एक जून को सिकल सेल एनीमिया (सिकलिन) से पीड़ित 20 वर्षीय युवती दीपिका गाड़ा की ब्लड नहीं मिलने से हुई मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। इस लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 28 जून 2026 को 4 संविदा कर्मचारियों को बर्खास्त (सेवा समाप्त) कर दिया गया है ।

उल्लेखनीय है कि भिलाई के मरोदा की रहने वाली 20 वर्षीय दीपिका गाड़ा को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां हीमोग्लोबिन मात्र 5.5 ग्राम होने और समय पर खून न मिलने के कारण उसने दम तोड़ दिया। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने अपर कलेक्टर योगिता देवांगन और सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी को जांच सौंपी थी। 27 दिनों की जांच में सामने आया कि ब्लड बैंक में 85 यूनिट रक्त उपलब्ध होने के बावजूद पीड़िता को ब्लड नहीं दिया गया। परिजनों को डोनर तलाशने को कहा गया, लेकिन डोनर नहीं मिलने पर ब्लड उपलब्ध नहीं कराया गया। डॉक्टरों की भी लापरवाही पाई गई।

इस मामले में रेडक्रॉस सोसायटी से ब्लड बैंक में नियुक्त दो लैब टेक्निशियन तरन्नुम जहां और नशरा परवीन तथा एनएचएम से नियुक्त दो स्टाफ नर्स जागेश्वरी देवी और तनुजा चंद्राकर की संविदा सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। वहीं स्टाफ नर्स अनसतसिया केरकेट्टा, पीजी रेजिडेंट डॉ. निखिल अग्रवाल और एनएचएम विशेषज्ञ डॉ. तृप्ति तिवारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए संयुक्त संचालक को पत्र भेजा गया है।

इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद एनएचएम स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन ने विरोध जताया है। उनका आरोप है कि ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. जे. पी. मेश्राम और आरएमओ डॉ. अखिलेश यादव के बार-बार बयान बदलने के बाद भी उन्हें बचा लिया गया है और केवल छोटे कर्मचारियों को ही निशाना बनाया गया है।

इस मामले में कलेक्टर की जांच रिपोर्ट के बाद छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी अस्पतालों के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो। अब किसी भी सिकल सेल, थैलेसीमिया और इमरजेंसी मरीज से खून के बदले खून (डोनर) की मांग नहीं की जा सकेगी। दुर्ग समेत प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों को रोजाना सुबह अपने उपलब्ध ब्लड स्टॉक की जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट करनी होगी। यदि ब्लड बैंक स्टाफ सहयोग नहीं करता है, तो ऑन-ड्यूटी डॉक्टर सीधे सिविल सर्जन को सूचित करने के लिए बाध्य होंगे।

   

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