सूरजपुर : पीएम आवास से हाथी प्रभावित क्षेत्र के परिवार को मिला सुरक्षित आशियाना
- DSS Admin
- Jun 22, 2026
सूरजपुर, 22 जून (हि.स.)। वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लिए सुरक्षित आवास केवल एक जरूरत नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान का आधार भी है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) ने जिले के प्रतापपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम सिंघरा निवासी करमचन्द्र के परिवार का वर्षों पुराना सपना पूरा कर दिया है। हाथियों की लगातार आवाजाही वाले क्षेत्र में अब उनका परिवार पक्के मकान में सुरक्षित जीवन बिता रहा है।
ग्राम सिंघरा एलीफेंट कॉरिडोर क्षेत्र में स्थित है, जहां हाथियों के दल का नियमित आवागमन बना रहता है। करमचन्द्र और उनका परिवार लंबे समय तक मिट्टी एवं खपरैल से बने जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर था। बरसात के मौसम और हाथियों की गतिविधियों के दौरान परिवार की चिंता और बढ़ जाती थी। मकान की कमजोर दीवारें और वन्यजीवों का खतरा उनके लिए हमेशा परेशानी का कारण बना रहता था।
करमचन्द्र का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की पात्रता सूची में शामिल होने के बाद ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत के सहयोग से आवास स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी की गई। हाथी प्रभावित क्षेत्र को देखते हुए प्रशासन ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष ध्यान दिया। योजना के तहत 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि तथा मनरेगा के माध्यम से 90 दिनों की मजदूरी का लाभ भी मिला।
निर्माण कार्य के दौरान जंगल से घिरे क्षेत्र में ईंट, सीमेंट और सरिया जैसी सामग्री पहुंचाना बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद पंचायत प्रतिनिधियों, रोजगार सहायक और ग्रामीणों के समन्वय से सभी आवश्यक संसाधन समय पर उपलब्ध कराए गए। हाथियों के सक्रिय मौसम से पहले ही मकान का निर्माण पूरा कर लिया गया।
आरसीसी लिंटल और पक्की छत से निर्मित यह मकान पहले के कच्चे घर की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और सुरक्षित है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण भी कराया गया है, जिससे परिवार को अब खुले में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती और वन्यजीवों से टकराव का खतरा भी कम हुआ है।
आज करमचन्द्र का पक्का मकान पूरी तरह तैयार है। योजना का लोगो और हितग्राही का नाम घर के सामने अंकित है, जो उनके लिए गर्व का विषय है। करमचन्द्र भावुक होकर कहते हैं कि सरकार की इस योजना ने उन्हें केवल एक घर नहीं, बल्कि परिवार और बच्चों के लिए सुरक्षित भविष्य दिया है। अब हाथियों की मौजूदगी की खबर मिलने पर भी पहले जैसा भय नहीं रहता और पूरा परिवार चैन की नींद सो पाता है।
करमचन्द्र की यह कहानी बताती है कि प्रभावी योजनाओं और प्रशासनिक समन्वय के माध्यम से कठिन भौगोलिक एवं प्राकृतिक चुनौतियों के बीच भी विकास और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। यह सफलता वनांचल क्षेत्रों में सुशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभाव की एक प्रेरक मिसाल है।

