निराश्रित गोवंश का संरक्षण और पशुपालन में कई आयामों पर आगे बढ़ रहा है लखनऊ

लखनऊ, 17 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश सरकार की लोक कल्याणकारी नीतियों के अंतर्गत जनपद लखनऊ में निराश्रित और बेसहारा गोवंश के संरक्षण के लिए एक अत्यंत सुव्यवस्थित ढांचा विकसित किया गया है। वर्तमान में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में हजारों की संख्या में आश्रय स्थल संचालित हैं, जो न केवल गोवंश को सुरक्षित आवास प्रदान कर रहे हैं, बल्कि उनके आहार, पेयजल और स्वास्थ्य की भी निरंतर निगरानी कर रहे हैं।

इन प्रयासों के केंद्र में प्रदेश सरकार की वह संकल्पना है, जिसमें पशुधन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना गया है। जनपद में संचालित कान्हा उपवन जैसे विशाल केंद्रों ने निराश्रित, बीमार और दुर्घटनाग्रस्त गोवंश को नया जीवन प्रदान किया है। 53 बीघा जैसी विस्तृत भूमि पर स्थापित ये केंद्र आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं।

जहाँ गोवंश की देखरेख के लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा समन्वय के साथ कार्य किया जा रहा है। सरकार की दूरदर्शी नीतियों का ही परिणाम है कि आज लखनऊ में गोवंश सहभागिता योजना के माध्यम से आम नागरिकों और किसानों को सीधे इस पवित्र अभियान से जोड़ा गया है।

इस योजना के अंतर्गत पशुपालकों को न केवल गोवंश सौंपे जाते हैं, बल्कि उनके भरण-पोषण के लिए मासिक आर्थिक अनुदान भी सुनिश्चित किया जाता है, जिससे सामाजिक सहभागिता और आर्थिक सहयोग का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत हुआ है।

पशु चिकित्सा के क्षेत्र में हुए क्रांतिकारी बदलावों ने जनपद के पशुधन की सुरक्षा को नया विस्तार दिया है। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण और डिवर्मिंग जैसे अभियानों ने लंपी वायरस जैसे संक्रामक रोगों पर प्रभावी नियंत्रण पाने में सफलता प्राप्त की है।

जिला प्रशासन के माध्यम से सुनिश्चित किया गया है कि प्रत्येक आश्रय स्थल पर पशुओं के लिए उचित उपचार कक्ष और गंभीर रूप से बीमार पशुओं के लिए पृथक वार्ड उपलब्ध हों। आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए संचालित मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स ने चिकित्सा सेवाओं को पशुपालकों के द्वार तक पहुँचा दिया है, जिससे समय पर इलाज मिलने से पशुहानि में भारी कमी आई है।

पिछले नौ वर्षों के आंकड़ों पर दृष्टि डालें तो लखनऊ जनपद में लगभग 31,343 गोवंशों का संरक्षण 101 गो आश्रय स्थलों में किया गया है, जो पशु कल्याण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है। इस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने हेतु 16.11 करोड़ रुपये की लागत से 14 वृहद गो संरक्षण केंद्रों का निर्माण कराया गया है, जो गोवंश संरक्षण के लिए एक स्थायी और दीर्घकालिक आधारभूत संरचना के रूप में उभरे हैं।

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश सरकार की योजनाएं केवल उपचार और संरक्षण तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि ये पशुपालकों की आय में वृद्धि और ग्रामीण समृद्धि का भी बड़ा आधार बनी हैं। नंदिनी कृषक समृद्धि योजना और मिनी नंदिनी जैसी पहलों ने लखनऊ के डेयरी क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार किया है।

इन योजनाओं के माध्यम से स्थानीय लाभार्थियों को लाभान्वित कर स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के मार्ग खोले गए हैं। इसी प्रकार नेशनल लाइव स्टॉक मिशन के तहत पशुधन आधारित आजीविका, नस्ल सुधार और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण नवाचार किए गए हैं।

कुक्कुट विकास योजना ने छोटे और सीमांत किसानों के लिए आय का एक वैकल्पिक और सशक्त स्रोत प्रदान किया है, जिससे विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तीकरण को बल मिला है। आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पशुपालन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा निरंतर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनसे पशुपालकों की कार्यक्षमता और दुग्ध उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।

नस्ल सुधार के कार्यक्रमों ने जनपद के पशुपालन परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। कृत्रिम गर्भाधान और उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्लों जैसे गिर और साहीवाल को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे मिशनों ने डेयरी क्षेत्र को व्यावसायिक रूप से लाभकारी बनाया है।

   

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