पंचायत के तीन स्तर पर होगा ऑडिट, भ्रष्टाचार और कटमनी के मामलों की जांच

कोलकाता, 20 मई (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में पंचायत से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पहले ही पूर्ववर्ती सरकार के समय के भ्रष्टाचार की जांच के लिए एक आयोग बनाने की घोषणा कर चुके हैं। अब पंचायत विभाग के मंत्री दिलीप घोष ने पंचायतों में हुए भ्रष्टाचार की फाइल खोलने की बात कही है।

मंगलवार प्रातःभ्रमण के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए दिलीप घोष ने कहा कि पंचायत के तीनों स्तर—ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद में ऑडिट कराया जाएगा। सभी परियोजनाओं की जांच होगी और देखा जाएगा कि कहीं कोई गड़बड़ी या अनियमितता तो नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यदि किसी तरह की साजिश या भ्रष्टाचार में कोई शामिल पाया जाता है तो उसे भी चिन्हित किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, सरकार खास तौर पर कटमनी और वसूली के आरोपों की जांच करना चाहती है। मुख्यमंत्री ने पहले भी इस मुद्दे पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है। इसी कारण अब सभी विभागों में जांच की प्रक्रिया तेज की जा रही है।

पिछले करीब डेढ़ दशक में 100 दिन के काम सहित कई सामाजिक और विकास परियोजनाओं पर बड़ी रकम खर्च की गई है। अब यह देखा जाएगा कि इन परियोजनाओं में पैसा किस तरह खर्च हुआ और क्या हर मामले में उपयोग प्रमाणपत्र (यूसी) मौजूद है या नहीं।

लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि कई विकास परियोजनाओं में ठेकेदारों से कटमनी ली गई। आरोप है कि इसमें जनप्रतिनिधियों से लेकर विभाग के कर्मचारी और अधिकारी भी शामिल रहे। ऑडिट के जरिए इन्हीं मामलों की जांच की जाएगी।

यदि किसी ठेकेदार की भूमिका अनियमितता या भ्रष्टाचार में सामने आती है तो उसे ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है। खासकर सड़क योजनाओं और कुछ अन्य विकास परियोजनाओं में गड़बड़ी की सबसे ज्यादा शिकायतें मिली हैं। सामाजिक योजनाओं में भी यदि कोई अनियमितता पाई गई तो उसे भी ऑडिट के दायरे में लाया जाएगा।

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