सिंगल-यूज प्लास्टिक का प्रयोग घटाएं, सतत अपशिष्ट प्रबंधन अपनाएं : डॉ. रश्मि सिंह

कानपुर, 27 जून (हि.स.)। सिंगल-यूज प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य और वन्यजीवों के लिए गंभीर चुनौती बन रहा है। पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को सतत अपशिष्ट प्रबंधन अपनाते हुए कचरे का पृथक्करण, पुनर्चक्रण और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देना चाहिए। यह बातें शनिवार को चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की संसाधन प्रबंधन एवं उपभोक्ता विज्ञान विभाग की प्रभारी डॉ. रश्मि सिंह ने कहीं।

महाविद्यालय की ओर से अपशिष्ट प्रबंधन विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य सिंगल-यूज प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाना और पर्यावरण संरक्षण के लिए सतत अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम में टीचिंग एसोसिएट एलेना ताखेल्लाम्बम और डॉ. स्वप्निल सिंह ने प्रतिभागियों को दैनिक जीवन में अपशिष्ट प्रबंधन के प्रभावी तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सिंगल-यूज प्लास्टिक जैव-अवक्रमणीय नहीं होती, जिससे भूमि, जल और मृदा प्रदूषण बढ़ता है। प्रतिभागियों को एकल-उपयोग प्लास्टिक का प्रयोग कम करने, पुनः उपयोग योग्य उत्पाद अपनाने, स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण, रीसाइक्लिंग तथा अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण के उपाय बताए गए।

कार्यक्रम में लैंडफिल के लिए पार्कों का विकास–एक पर्यावरण-अनुकूल दृष्टिकोण विषय पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने क्ले कैपिंग और फाइटोकैपिंग तकनीकों की जानकारी देते हुए बताया कि फाइटोकैपिंग अपेक्षाकृत अधिक टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और किफायती तकनीक है। इससे लैंडफिल से निकलने वाले हानिकारक उत्सर्जन और लीचेट को कम करने के साथ ऐसे स्थलों को हरित क्षेत्र और पार्क के रूप में विकसित करने में भी मदद मिलती है।

कार्यक्रम में करीब 30 शिक्षकों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग को कम करने तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए जिम्मेदार और सतत अपशिष्ट प्रबंधन अपनाने का संकल्प लिया।

   

सम्बंधित खबर