सरकारी स्तर पर मलमास मेला का निबंधन और परवाना लंबित

नालंदा, बिहारशरीफ 12 मई (हि.स.)।

विश्व प्रसिद्ध राजकीय मलमास मेला 2026 का शुभारंभ आगामी 17 मई से राजगीर में होने जा रहा है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को लेकर जिला प्रशासन द्वारा तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

मेला क्षेत्र में आश्रय स्थल, साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, बैरिकेडिंग, जिग-जैग निर्माण, सड़क मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर युद्धस्तर पर काम चल रहा है। जिलाधिकारी कुंदन कुमार स्वयं तैयारियों की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। इसके बावजूद मेला संचालन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य अब तक अधूरे पड़े हैं, जिससे मेला सैरात के ठेकेदारों की परेशानी बढ़ती जा रही है।मेला शुरू होने में अब महज चार दिन शेष बचे हैं, लेकिन अब तक मेला सैरात बंदोबस्ती का निबंधन नहीं हो सका है और न ही परवाना जारी किया गया है।

इस कारण मेला संचालन से जुड़े ठेकेदारों में असमंजस और चिंता की स्थिति बनी हुई है। नियम के अनुसार मेला बंदोबस्ती की प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद निबंधन एवं परवाना जारी कर दिया जाना चाहिए था, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।मलमास मेला सैरात के ठेकेदार संजय कुमार सिंह ने नगर परिषद प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है।

उन्होंने नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को पत्र भेजकर कहा है कि मेला सैरात की नीलामी प्रक्रिया पूरी हुए एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक निबंधन और परवाना जारी नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इस प्रशासनिक देरी के कारण मेला क्षेत्र में दुकान लगाने वाले दुकानदारों को स्थान आवंटित करने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।ठेकेदार का कहना है कि मेला क्षेत्र में दुकान लगाने वाले कारोबारियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। बाहर से आने वाले व्यापारी लगातार संपर्क कर रहे हैं, लेकिन भूमि की उपलब्धता और प्रशासनिक अनुमति स्पष्ट नहीं होने के कारण उन्हें दुकान लगाने की प्रक्रिया शुरू नहीं कराई जा रही है।

इसका सीधा असर मेला संचालन की व्यवस्था पर पड़ रहा है और आर्थिक नुकसान की आशंका भी बढ़ती जा रही है।संजय कुमार सिंह ने अपने ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया है कि मेला सैरात की अधिकांश भूमि अब तक अतिक्रमण मुक्त नहीं कराई गई है। उन्होंने बताया कि मेला क्षेत्र के लिए कुल 73 एकड़ से अधिक भूमि चिन्हित है, लेकिन नगर परिषद द्वारा कागजों पर मात्र 41 एकड़ भूमि की ही बंदोबस्ती की गई है। जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि मौके पर 25 एकड़ से अधिक खाली जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही है।उन्होंने कहा कि कई बार नगर परिषद प्रशासन को मौखिक और लिखित रूप से इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई

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