मुख्यमंत्री ने मिशन कायाकल्प, मानसून प्रबंधन और कांवड़ यात्रा तैयारियों की समीक्षा की

नई दिल्ली, 06 जुलाई (हि.स.)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को डीडीसी एपेक्स कमेटी की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मिशन कायाकल्प के तहत सरकारी विद्यालयों में किए जा रहे सुधार कार्यों, आगामी कांवड़ यात्रा की तैयारियों और मॉनसून के दौरान जलभराव से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की।

बैठक में सभी जिलाधिकारियों ने अपने-अपने जिलों के दो-दो जर्जर सरकारी विद्यालयों के कायाकल्प के लिए किए गए कार्यों की जानकारी दी। साथ ही, राजधानी में मानसून को देखते हुए विभिन्न विभागों की तैयारियों का भी विस्तृत जायजा लिया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल बच्चों को अच्छी शिक्षा देना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित, स्वच्छ और प्रेरणादायक माहौल भी उपलब्ध कराना है। इसी उद्देश्य से ‘मिशन कायाकल्प’ के तहत सभी जिलाधिकारियों को ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान अपने-अपने जिलों के दो सबसे जर्जर सरकारी विद्यालयों का चयन कर उनका पूरी तरह से कायाकल्प करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

बैठक में विभिन्न जिलों द्वारा किए गए कार्यों की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने उन अधिकारियों की विशेष सराहना की, जिन्होंने तय कार्यों से आगे बढ़कर विद्यालयों में पुस्तकालय, स्टेम लैब, साइंस लैब, कंप्यूटर लैब, स्मार्ट क्लास, वॉटर कूलर, शौचालयों का नवीनीकरण और आकर्षक वॉल पेंटिंग जैसी बेहतर सुविधाएं विकसित कीं।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से आउटर नॉर्थ, उत्तर-पूर्व और नई दिल्ली के जिलाधिकारियों द्वारा मिशन कायाकल्प के तहत किए गए उल्लेखनीय कार्यों की प्रशंसा करते हुए उनके प्रयासों को अन्य जिलों के लिए प्रेरणादायक बताया।

मॉनसून की तैयारियों की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए स्पष्ट किया कि राजधानी दिल्ली में किसी भी स्थिति में जलभराव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नागरिकों के लिए यह महत्वपूर्ण नहीं है कि संबंधित क्षेत्र पीडब्ल्यूडी, एमसीडी, दिल्ली जल बोर्ड या डीडीए के अधिकार क्षेत्र में आता है, क्योंकि जनता केवल अपनी समस्याओं का स्थायी समाधान चाहती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे केवल दफ्तरों तक सीमित न रहें, बल्कि स्वयं फील्ड में जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन करें। पहली ही बारिश में जिन भी संवेदनशील स्थानों और हॉटस्पॉट पर जलभराव की स्थिति बनी है, वहां तत्काल आवश्यक पंपों की व्यवस्था, नालों की सफाई और ड्रेनेज कनेक्टिविटी को दुरुस्त किया जाए।

बैठक में बलजीत नगर, पटेल नगर, संगम विहार, बवाना, किराड़ी सेक्टर-20 से 24, पटपड़गंज, मुंगेशपुर, रामा विहार, खेड़ी पुल, लक्ष्मी नगर, कृष्णा नगर और मंडावली सहित विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में जलभराव की संभावनाओं और वहां चल रही परियोजनाओं की गहन समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में कई विभागों की संयुक्त परियोजनाएं लंबित हैं, वहां संबंधित एजेंसियां मिलकर एक समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करें। मोबाइल फोन पर शिकायतों का इंतजार करने के बजाय अधिकारी खुद सड़कों और नालों का निरीक्षण करें तथा पंपिंग स्टेशनों, ड्रेनेज लिंक और डिसिल्टिंग के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

आगामी कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने जिलों में पूर्व वर्षों में शिविर आयोजित करने वाली पंजीकृत संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर समय रहते सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए पेयजल, स्वच्छता, चिकित्सा, बिजली और सुगम यातायात के पुख्ता इंतजाम पहले से ही कर लिए जाएं। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने पीएम उदय योजना के तहत दिल्ली की सभी अनधिकृत कॉलोनियों में विशेष कैंप लगाने के निर्देश दिए, ताकि राजधानी के नागरिक आगामी 31 अक्टूबर की अंतिम तिथि से पहले अपना रजिस्ट्रेशन आसानी से पूरा करवा सकें।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जिले में मिनी सचिवालयों की स्थापना, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की प्रगति, प्रत्येक शनिवार जिला मजिस्ट्रेट कार्यालयों में आयोजित होने वाली जनसुनवाई, सार्वजनिक स्थलों एवं कार्यालय परिसरों के आसपास नियमित स्वच्छता अभियान तथा नागरिकों को गर्मी से राहत प्रदान करने के लिए विकसित किए जा रहे कूलिंग जोन की भी विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को इन सभी पहलों का प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने एमसीडी के अधिकारियों को फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने का अभियान और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए, ताकि पैदल यात्रियों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके। उन्होंने 70 लाख पौधारोपण अभियान में सभी विधायकों एवं विभागों की सक्रिय एवं व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने डस्ट मिटिगेशन के तहत सड़कों के सेंट्रल वर्ज और ब्राउन एरिया में बड़े पैमाने पर घास एवं हरित आवरण विकसित करने के निर्देश दिए, ताकि धूल प्रदूषण में कमी लाई जा सके और राजधानी को अधिक स्वच्छ एवं हरित बनाया जा सके।

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