नशा मुक्त समाज के निर्माण में प्रधानाचार्य निभाएं अग्रणी भूमिका : अपूर्व देवगन

मंडी, 19 जून (हि.स.)। मंडी जिला में नशा मुक्त भारत अभियान तथा एचपीवी टीकाकरण को लेकर सरकारी एवं निजी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की एक दिवसीय संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी में स्वास्थ्य एवं कल्याण विभाग तथा उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यालयों में नशा मुक्त वातावरण तैयार करना, किशोर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा एचपीवी टीकाकरण के प्रति सकारात्मक माहौल तैयार करना रहा।

उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक प्रशिक्षण नहीं, बल्कि जागरूकता और रोकथाम के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता है। उन्होंने बताया कि एंटी चिट्टा अभियान के पहले चरण में जिले की 24 हाई रिस्क रेड जोन पंचायतों की पहचान की गई है, जहां राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की अध्यक्षता में नशा निवारण समितियां गठित की गई हैं। उन्होंने प्रधानाचार्यों से मासिक एंटी चिट्टा बैठकों को प्रभावी बनाने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने तथा विद्यार्थियों से नियमित संवाद स्थापित करने का आह्वान किया।

उपायुक्त ने विद्यालयों में खेल, फिटनेस और योग गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा समय-समय पर विशेषज्ञों के माध्यम से विद्यार्थियों को नशे और बुरी आदतों के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि 26 जून को सभी विद्यालयों में एंटी ड्रग डे पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानाचार्य विद्यालय की दिशा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें इस जिम्मेदारी को मजबूती से निभाना चाहिए।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश ठाकुर ने कहा कि नशे की समस्या का उपचार करने से अधिक महत्वपूर्ण उसे प्रारंभ होने से पहले रोकना है। उन्होंने कहा कि ड्रग डिमांड रिडक्शन अभियान में सबसे अहम भूमिका प्रधानाचार्यों की है, क्योंकि वे प्रतिदिन बच्चों के साथ रहते हैं। उन्होंने कहा कि इस अभियान का मुख्य फोकस उपचार नहीं बल्कि रोकथाम, जागरूकता और शुरुआती पहचान है।

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