सरिस्का में बाघों की संख्या 56 पहुंची, जल्द 100 का लक्ष्य : भूपेन्द्र यादव
- DSS Admin
- Jun 28, 2026


अलवर, 28 जून (हि.स.)। सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्स्थापना के 18 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का रविवार को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव तथा राजस्थान के वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा ने उद्घाटन किया। कार्यशाला का विषय बाघ पुनर्स्थापना : अवसर एवं चुनौतियां रखा गया।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री और राज्य मंत्री ने ‘भारत में बाघों के सक्रिय प्रबंधन हेतु रोडमैप’, ‘भारत में बाघ पुनर्स्थापना एवं पुनर्बहाली’ तथा ‘प्रोजेक्ट चीता वार्षिक प्रतिवेदन’ सहित तीन महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन किया। साथ ही सरिस्का टाइगर रिजर्व की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए दो नए वाहन भी वन विभाग को सौंपे गए।
केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज विश्व के लगभग 70 प्रतिशत बाघों का संरक्षण कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2008 में शुरू हुई सरिस्का बाघ पुनर्स्थापना परियोजना आज एक सफल मॉडल बन चुकी है और वर्तमान में यहां बाघों की संख्या 56 तक पहुंच गई है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में यह संख्या 100 तक पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि बाघ संरक्षण केवल वैज्ञानिक प्रबंधन से संभव नहीं है, बल्कि स्थानीय समुदायों की भागीदारी और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की भावना भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने पन्ना, सरिस्का, कूनो, बांदीपुर, राजाजी और सिमलीपाल के उदाहरण देते हुए स्थानीय समुदायों के योगदान को रेखांकित किया।
भूपेन्द्र यादव ने बताया कि सरिस्का की सफलता की कहानी को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने के लिए आगामी टाइगर मैराथन के साथ सरिस्का के 10 प्रमुख स्थलों पर फोटोग्राफी प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि अलवर में पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सिलीसेढ़ झील को रामसर साइट का दर्जा दिलाया गया है, जबकि मंगलसर और मानसरोवर बांध को भी रामसर साइट घोषित कराने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत अधिक से अधिक पौधरोपण का आह्वान करते हुए अलवर की पहाड़ियों पर एक करोड़ पौधे लगाने की योजना की जानकारी भी दी।
वन राज्यमंत्री संजय शर्मा ने कहा कि कभी बाघ विहीन हो चुका सरिस्का आज 56 बाघों का सुरक्षित आवास बन चुका है। उन्होंने बताया कि 28 जून को बाघिन ‘राजमाता’ की स्मृति में सरिस्का डे के रूप में मनाया जाता है तथा सरिस्का में उनकी प्रतिमा भी स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से वन्यजीव संरक्षण को मजबूत कर रही है। वन मेलों के माध्यम से वन उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा दिया जा रहा है तथा विस्थापित ग्रामीणों के पुनर्वास के लिए बेहतर पैकेज और कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) मॉडल पर टाउनशिप विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के महानिदेशक एवं विशेष सचिव सुशील कुमार अवस्थी ने बताया कि देश में वर्तमान में 58 टाइगर रिजर्व हैं, जिनमें लगभग 3,682 जंगली बाघ पाए जाते हैं। पिछले एक दशक में टाइगर रिजर्व की संख्या 46 से बढ़कर 58 हो गई है, जबकि संरक्षित क्षेत्र का विस्तार लगभग 84,450 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच गया है। इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस के महानिदेशक डॉ. एस.पी. यादव ने बाघ पुनर्स्थापना, वैज्ञानिक मॉनिटरिंग और क्षमता विकास पर विस्तार से विचार रखे।
कार्यशाला में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, भारतीय वन्यजीव संस्थान, राजस्थान वन विभाग सहित देशभर के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, वैज्ञानिक, संरक्षण विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान सरिस्का पर तैयार की जा रही एक डॉक्यूमेंट्री की विशेष झलक भी प्रदर्शित की गई।
---------------

