आईआईटी खड़गपुर में 11वें अंतरराष्ट्रीय स्पिक मैके सम्मेलन का भव्य समापन

आईआईटी खड़गपुर में सजी सांस्कृतिक साधनाआईआईटी खड़गपुर में सजी सांस्कृतिक साधना

खड़गपुर, 01 जून (हि. स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर में प्लेटिनम जयंती वर्ष समारोहों के अंतर्गत आयोजित 11वें अंतरराष्ट्रीय स्पिक मैके सम्मेलन का रविवार को भव्य समापन हो गया। 25 से 31 मई तक चले इस सप्ताहव्यापी सम्मेलन में भारत और विदेशों से आए डेढ़ हजार से अधिक छात्र-प्रतिनिधियों, कलाकारों, विद्वानों तथा संस्कृति प्रेमियों ने भाग लेकर भारतीय सांस्कृतिक विरासत की विविध विधाओं का अनुभव प्राप्त किया।

सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण अंतिम रात्रि आयोजित अखंड संगीत प्रस्तुति रही। स्वयंसेवकों और आयोजकों के सम्मान समारोह के बाद रात साढ़े आठ बजे शुरू हुई संगीत यात्रा सोमवार सुबह छह बजे तक निरंतर जारी रही।

सम्मेलन के दौरान भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य, रंगमंच, लोककला, शिल्प, योग, ध्यान और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए। देश के प्रतिष्ठित गुरुओं और कलाकारों के मार्गदर्शन में हुए प्रशिक्षण सत्रों का समापन छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियों के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने सप्ताहभर अर्जित ज्ञान और कौशल का प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ पद्म विभूषण डॉ. एन. राजम के भावपूर्ण हिंदुस्तानी वायलिन वादन से हुआ। इसके बाद पद्मश्री विदुषी अश्विनी भिडे देशपांडे ने शास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया। पद्मश्री पंडित तेजेंद्र नारायण मजूमदार ने सरोद वादन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।

मध्यरात्रि के बाद संगीत कलानिधि सम्मान से अलंकृत विद्वान लालगुडी जी. जे. आर. कृष्णन और विदुषी लालगुडी विजयलक्ष्मी की कर्नाटक वायलिन युगलबंदी ने श्रोताओं का मन मोह लिया। वहीं प्रातःकाल पद्मश्री उस्ताद वासिफुद्दीन डागर के ध्रुपद गायन के साथ इस विशेष संगीत श्रृंखला का समापन हुआ।

सम्मेलन के अंतिम दिन प्रतिभागियों ने आईआईटी खड़गपुर परिसर तथा आसपास के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का विरासत भ्रमण भी किया। इस दौरान उन्हें क्षेत्र की शैक्षणिक, स्थापत्य और सांस्कृतिक धरोहरों के बारे में जानकारी दी गई।

सम्मेलन की समाप्ति पर प्रतिभागी भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, सेवा, अनुशासन, ध्यान और परंपराओं के प्रति गहरी समझ तथा उन्हें आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ अपने-अपने स्थानों के लिए रवाना हुए।

आईआईटी खड़गपुर के जनसंपर्क अधिकारी प्रतीक दामा ने कहा कि सम्मेलन के दौरान प्रतिभागियों की अभूतपूर्व सहभागिता और उत्साह ने सिद्ध किया है कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत आज भी युवाओं के लिए उतनी ही प्रासंगिक और प्रेरणादायी है। उन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले स्पिक मैके, कलाकारों, स्वयंसेवकों, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

प्रतीक दामा ने कहा कि यह सम्मेलन आईआईटी खड़गपुर के प्लेटिनम जयंती समारोहों के इतिहास में एक अविस्मरणीय अध्याय के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।

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