शिमला में सफाई कर्मचारी हड़ताल पर, प्रशासन ने लागू किया एस्मा, सफाई व्यवस्था प्रभावित
- DSS Admin
- May 15, 2026
शिमला, 15 मई (हि.स.)। राजधानी शिमला में नगर निगम के तहत कार्यरत सैहब सफाई कर्मचारियों ने शुक्रवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। जिला प्रशासन ने इस हड़ताल को अनिवार्य सेवाओं को प्रभावित करने का कदम करार देते हुए सफाई कर्मियों पर एस्मा लागू कर दिया है।
शहर में पीक पर चल रहे टूरिस्ट सीज़न के दौरान हड़ताल शुरू होते ही राजधानी की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने लगी है और स्वच्छता सर्वेक्षण के बीच शहर की रैंकिंग पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कई इलाकों से आज कूड़ा नहीं उठ पाया, जिससे शहरवासियों की चिंता बढ़ गई है।
हड़ताल पर गए सफाई कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें नियमों के अनुसार हर साल 10 फीसदी वेतन बढ़ोतरी मिलनी चाहिए, लेकिन लंबे समय से उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। सैहब सफाई कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष जसवंत सिंह ने कहा कि कई बार प्रशासन और अधिकारियों के सामने अपनी मांगें रखी गईं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अब आर-पार की लड़ाई लड़ने को मजबूर हैं।
जसवंत सिंह ने कर्मचारियों पर एस्मा वापस लेने की भी मांग की। उनका कहना है कि कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं और प्रशासन दबाव बनाकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपनी मांगों के लिए नौकरी जाने का जोखिम उठाने को भी तैयार हैं, लेकिन पीछे हटने वाले नहीं हैं। यूनियन ने यह सवाल भी उठाया कि जब जनता से हर साल 10 फीसदी बढ़ोतरी के साथ शुल्क वसूला जा रहा है, तो कर्मचारियों को उसी हिसाब से वेतन लाभ क्यों नहीं दिया जा रहा।
इस बीच श्रमिक संगठन सीटू ने भी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का खुलकर समर्थन किया है। सीटू के राज्य अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि कर्मचारियों के मुद्दों को लेकर पहले से बातचीत चल रही थी, इसके बावजूद उनके वेतन में 10 फीसदी कटौती कर दी गई। उनका कहना है कि श्रम कानूनों के तहत जब लेबर ऑफिस में वार्ता चल रही हो, तब कर्मचारियों की सेवा शर्तों में बदलाव नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों ने हड़ताल का 14 दिन पहले नोटिस दिया था, इसलिए इस दौरान एस्मा लागू करना भी नियमों के खिलाफ है।
विजेंद्र मेहरा ने चेतावनी दी कि अगर कर्मचारियों के आंदोलन को जबरदस्ती दबाने की कोशिश की गई तो आंदोलन और बड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो आईजीएमसी, होटल उद्योग, रेहड़ी-फहड़ी यूनियन और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि सीटू से जुड़ी दूसरी यूनियनें भी समर्थन में उतर सकती हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।
सीटू ने नगर निगम पर लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने का आरोप भी लगाया। विजेंद्र मेहरा ने कहा कि पानी, कूड़ा और प्रॉपर्टी टैक्स के बिल लगातार बढ़ाए जा रहे हैं, जबकि कर्मचारियों को उनका अधिकार नहीं मिल रहा। उन्होंने इस मुद्दे पर जनता से भी समर्थन की अपील की।
उधर, नगर निगम शिमला के आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था आवश्यक सेवाओं में शामिल है और इसे हड़ताल के जरिए प्रभावित करना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि नगर निगम में 677 सैहब कर्मी कार्यरत हैं और वर्ष 2017 में भी हुई हड़ताल पर अदालत सख्त टिप्पणी कर चुकी है। उन्होंने कहा कि आवश्यक सेवाओं में बाधा डालने वालों के खिलाफ एस्मा के प्रावधान लागू किए गए हैं।
आयुक्त के अनुसार सफाई कर्मचारियों की बीमा सहित कई मांगों को पहले ही स्वीकार किया जा चुका है। इसके बावजूद हड़ताल का फैसला तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि शहरवासियों को परेशानी से बचाने के लिए निगम प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था तैयार कर ली है। आउटसोर्स कर्मचारियों से सफाई कार्य करवाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर ठेकेदारों के माध्यम से अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था भी की जाएगी।
उन्होंने यह भी माना कि हड़ताल का सबसे अधिक असर डोर-टू-डोर गार्बेज कलेक्शन पर पड़ सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे कूड़ा स्वयं गार्बेज कलेक्शन सेंटर तक पहुंचाएं ताकि शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराने से बच सके।
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