बाहर क्या हो रहा, यह आपके नियंत्रण में नहीं, आप अपने भीतर कैसे हैं, यह केवल आपके हाथों में है: सद्गुरु जग्गी वासुदेव
- DSS Admin
- Jun 27, 2026
पटना, 27 जून (हि.स.)।
आध्यात्मिक गुरु और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने शनिवार को राजधानी पटना के बापू सभागार में देर शाम अपने पहले सार्वजनिक कार्यक्रम में लोगों से संवाद किया।
अपने सम्बोधन में सद्गुरु ने जोर देते हुए कहा कि बाहर क्या हो रहा है, यह हमेशा आपके नियंत्रण में नहीं होता, लेकिन आप अपने भीतर कैसे हैं, यह केवल आपके हाथों में है।
उन्होंने कहा कि इंसान अक्सर अपनी यादों (बीते कल) और कल्पनाओं (भविष्य) से दुखी होता है, जिनका असल में कोई अस्तित्व ही नहीं है। यदि आप स्वयं को कष्ट देने से इंकार कर दें, तो कोई दूसरा आपको कभी दुखी नहीं कर सकता।
सद्गुरु ने कहा कि मनुष्य जो कुछ भी सोचता है, वह सब कुछ हासिल नहीं कर सकता, लेकिन उसके लिए प्रयास अवश्य कर सकता है। उन्होंने कहा कि जीवन की सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग चाहते हैं कि हर चीज सौ प्रतिशत उनके अनुसार हो, जबकि यह संभव नहीं है। ''अगर आपके अनुसार 51 प्रतिशत भी चीजें हो रही हैं और लोग उस दिशा में काम कर रहे हैं, तो खुद को भाग्यशाली समझिए।
सद्गुरु ने कहा कि मनुष्य और चिंपैंजी के डीएनए में मात्र 1.3 प्रतिशत का अंतर है, लेकिन बुद्धिमत्ता के स्तर पर मनुष्य ने असाधारण विकास किया है। उन्होंने कहा कि इंसान अपनी कल्पनाओं को वास्तविकता में बदलने की क्षमता रखता है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।
उन्होंने कहा कि ''मानव होने का अर्थ है अपने भीतर मानवता का निरंतर विकास करते रहना। यदि व्यक्ति स्वयं को विकसित नहीं करता, तो उसके और अन्य जीवों के बीच का अंतर कम हो जाता है। अधिकांश लोग या तो अतीत की यादों में जीते हैं या भविष्य की कल्पनाओं में खोए रहते हैं, जबकि सबसे महत्वपूर्ण वर्तमान में जीना है।
सद्गुरु ने कहा कि व्यक्ति को अपने विचारों, भावनाओं और अपने आसपास की परिस्थितियों को नियंत्रित करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। जो व्यक्ति स्वयं पर नियंत्रण स्थापित कर लेता है, वही वास्तविक अर्थों में अधिक संतुष्ट और खुशहाल जीवन जी सकता है। बिहार से जुड़े एक सवाल पर हंसते हुए सद्गुरु ने कहा कि जब नालंदा के ज्ञान की बात करते हैं तो जरूरी है कि बख्तियारपुर का नाम बदल दें।
---------------

