राजस्थान भर में सफाई व्यवस्था ठप: सामूहिक अवकाश पर गए सफाई कर्मचारी

जयपुर, 27 जून (हि.स.)। संयुक्त वाल्मीकि एवं सफाई श्रमिक संघ के आह्वान पर शनिवार से जयपुर सहित पूरे राजस्थान में सफाई कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश और कार्य बहिष्कार का व्यापक असर देखने को मिला। आंदोलन के पहले ही दिन राजधानी जयपुर की सफाई व्यवस्था चरमरा गई। शहर के कई इलाकों में कचरे के ढेर लग गए, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण पूरी तरह प्रभावित रहा और सार्वजनिक स्थानों पर भी सफाई नहीं हो सकी। नगर निगम प्रशासन ने उपलब्ध संसाधनों और वैकल्पिक व्यवस्थाओं के जरिए सफाई व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया, लेकिन हालात सामान्य नहीं हो सके।

संघ के अध्यक्ष नन्दकिशोर डंडोरिया के नेतृत्व में सफाई कर्मचारी सुबह अपने-अपने वार्डों की हाजरी गाहों पर एकत्र हुए और विरोध प्रदर्शन किया। सुबह नौ बजे संघर्ष समिति के नेतृत्व में छोटी चौपड़ पर प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान सफाई कर्मचारियों ने छोटी चौपड़, चौगान स्टेडियम चौराहा सहित विभिन्न स्थानों पर हुपर और ट्रैक्टरों से कचरा सड़क पर खाली कर सरकार और प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया, जिससे कई स्थानों पर यातायात भी प्रभावित हुआ। विभिन्न निजी संस्थानों में कार्यरत वाल्मीकि समाज के सफाई कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल रहे। जिससे वहां भी सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई।

वहीं इस आंदोलन के पहले दिन कई कर्मचारियों को हड़ताल की जानकारी नहीं थी। संघर्ष समिति के सदस्यों ने ऐसे कर्मचारियों को आंदोलन की जानकारी देते हुए उन्हें कार्य बहिष्कार में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। यूनियन ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी छह सूत्रीय मांगों का समाधान नहीं होगा, तब तक सामूहिक अवकाश और सफाई कार्य का बहिष्कार जारी रहेगा।

डंडोरिया ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगों में परंपरागत रूप से सफाई कार्य करने वालों को भर्ती में प्राथमिकता देना, न्यायालय के आदेश से पात्र पाए गए कर्मचारियों की नियुक्ति, ठेका प्रथा समाप्त करना, पूर्व एवं वर्तमान में सफाई कार्य कर रहे कर्मचारियों को प्राथमिकता देना तथा पहले वर्ष कुशल, दूसरे वर्ष अर्द्धकुशल मानते हुए दो वर्ष बाद कर्मचारियों को स्थायी करना शामिल है। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया यूनियन के साथ हुए पूर्व समझौतों के अनुरूप लागू की जाए।

उन्होंने कहा कि इन मांगों को लेकर सफाई कर्मचारी लंबे समय से आंदोलन और भूख हड़ताल कर रहे थे, लेकिन समाधान नहीं निकलने पर अब कार्य बहिष्कार का रास्ता अपनाना पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार की ओर से सकारात्मक निर्णय नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा। साथ ही दावा किया कि वाल्मीकि समाज में भारी आक्रोश है और यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र हो सकता है।

आंदोलन को व्यापक बनाने के लिए संघर्ष समिति ने 28 जून को किशनगढ़, अजमेर और ब्यावर का दौरा करने की घोषणा की है। इसके अलावा रात्रि में वाल्मीकि समाज के जागरूक नागरिकों एवं संघर्ष समिति के सदस्य विभिन्न कॉलोनियों में जन-जागरण अभियान चलाकर अधिक से अधिक कर्मचारियों को आंदोलन से जोड़ेंगे।

इधर राज्य सरकार ने सफाई कर्मचारी भर्ती का नया मॉडल तैयार किया है। इसके तहत चयनित अभ्यर्थियों की पहले संविदा आधार पर नियुक्ति होगी और पांच वर्ष तक कार्य का मूल्यांकन करने के बाद संतोषजनक प्रदर्शन पर नियमित किया जाएगा। स्वायत्त शासन विभाग के सचिव रवि जैन ने स्पष्ट किया कि भर्ती में किसी विशेष समाज को प्राथमिकता देने का कोई प्रावधान नहीं होगा। भर्ती प्रक्रिया सामान्य सरकारी नियमों और आरक्षण व्यवस्था के अनुरूप होगी तथा इसकी विज्ञप्ति शीघ्र जारी की जाएगी।

नगर निगम जयपुर ग्रेटर और हेरिटेज से जुड़े इस आंदोलन के कारण प्रशासन पर एक ओर सफाई व्यवस्था बहाल करने तो दूसरी ओर कर्मचारियों की मांगों पर शीघ्र वार्ता कर समाधान निकालने का दबाव बढ़ गया है।

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