सरकार ने अयोग्य उम्मीदवारों का सही विवरण नहीं दिया : शिक्षिका सोमा दास

कोलकाता, 3 अप्रैल (हि.स.) । सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्कूल भर्ती घोटाले में 25 हजार 753 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द किए जाने के बाद, गंभीर बीमारी से जूझ रही शिक्षिका सोमा दास ने राज्य सरकार और स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) पर सही जानकारी पेश न करने का आरोप लगाया। सुप्रीम कोर्ट ने दास जैसी गंभीर रूप से बीमार शिक्षकों को मानवीय आधार पर राहत दी है और उनकी नौकरी बरकरार रखी है।

दास, जो कैंसर से पीड़ित हैं ने कहा, एसएससी और राज्य सरकार सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में यह स्पष्ट नहीं कर सके कि कितने उम्मीदवारों को गलत तरीके से नौकरी मिली थी। इसी वजह से आज की यह स्थिति बनी है।

उन्होंने कहा कि मैंने खुद कई सुनवाइयों में भाग लिया और देखा कि जज योग्य उम्मीदवारों की नौकरियां बचाने का हरसंभव प्रयास कर रहे थे लेकिन राज्य सरकार और एसएससी ने उनकी स्थिति को सही तरीके से पेश नहीं किया।

दास ने कहा कि उन्होंने 2016 की एसएससी परीक्षा पास करने के बाद पूरी योग्यता के साथ नौकरी हासिल की थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का आभार जताते हुए कहा, कलकत्ता हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट ने मेरी स्थिति को अलग नजरिए से देखा। मैं इसके लिए आभारी हूं।

हालांकि, उन्होंने उन अभ्यर्थियों के लिए संवेदना जताई जिनकी नौकरियां छिन गईं। उन्होंने कहा, मेरा दिल उन लोगों के लिए दुखी है जो अपनी गलती के बिना नौकरी से बाहर हो गए।

सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने के भीतर नई भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। इस पर दास ने कहा, कई उम्मीदवारों की उम्र 30 वर्ष से अधिक हो चुकी है। क्या वे दोबारा परीक्षा में बैठ सकते हैं? मैं उनके दर्द को पूरी तरह समझती हूं।

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने 22 अप्रैल 2024 के कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। साथ ही, राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया।

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग कर्मचारियों को मानवीय आधार पर राहत देते हुए उनकी नौकरियां बरकरार रखने का निर्देश दिया।

इस मामले में राज्य सरकार की सीबीआई जांच को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट चार अप्रैल को सुनवाई करेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

   

सम्बंधित खबर