जंतर-मंतर प्रदर्शन के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के वकील, पुलिस कार्रवाई की निंदा
- MILAN SINGH JAMWAL
- Jul 23, 2026
नई दिल्ली, 23 जुलाई: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के समर्थन में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के कई वरिष्ठ और युवा अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का सामूहिक वाचन किया। इस दौरान वकीलों ने प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करना संविधान द्वारा प्रदत्त लोकतांत्रिक अधिकार है।
वकीलों ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अधिकार देता है। उनका कहना था कि यदि कोई प्रदर्शन शांतिपूर्ण है, तो उस पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता। इस अवसर पर अधिवक्ताओं ने संविधान की प्रस्तावना पढ़कर न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल आदर्शों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
यह विरोध हाल के दिनों में जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई के बाद सामने आया। सुप्रीम कोर्ट बार से जुड़े कई अधिवक्ताओं और संगठनों ने पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में असहमति की आवाज़ को दबाने के बजाय संवैधानिक दायरे में उसका सम्मान किया जाना चाहिए।
इस बीच, पुलिस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लेने की मांग भी की गई, लेकिन शीर्ष अदालत ने तत्काल इस मामले में सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
घटनाक्रम के बाद जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन और पुलिस की भूमिका को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। विभिन्न सामाजिक संगठनों, छात्र समूहों और कानूनी समुदाय के कई सदस्यों ने प्रदर्शनकारियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की मांग की है, जबकि प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।

