फलता परिणाम के बाद शुभेंदु अधिकारी ने कहा— डायमंड हार्बर मॉडल अब हार-बार मॉडल
- DSS Admin
- May 24, 2026
कोलकाता, 24 मई (हि. स.)। फलता विधानसभा पुर्नमतदान के नतीजे सामने आते ही पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट में उन्होंने तृणमूल के “डायमंड हार्बर मॉडल” को “हार-बार (हारने का) मॉडल” करार देते हुए पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधा।
हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर सांसद अभिषेक बनर्जी पर सीधा हमला माना जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान अभिषेक बनर्जी लगातार “डायमंड हार्बर मॉडल” का जिक्र करते रहे थे।
मुख्यमंत्री ने भाजपा उम्मीदवार देबांशु पांडा की बड़ी जीत पर मतदाताओं को धन्यवाद देते हुए लिखा कि उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को एक लाख वोटों से जिताने की अपील की थी, लेकिन जीत का अंतर एक लाख आठ हजार से अधिक हो गया। उन्होंने फलता के मतदाताओं को नमन करते हुए कहा कि सरकार विकास के माध्यम से जनता का यह विश्वास लौटाएगी।
इसके बाद शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता में रहते हुए पार्टी “माफिया कंपनी” में बदल गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग, सिंडिकेट, कटमनी और धमकी की राजनीति के जरिए लोगों का शोषण किया गया।
अपने पोस्ट में मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए अभिषेक बनर्जी पर भी निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि पैराशूट से उतरकर सेनापति बनने वाला एक जालसाज लोकतंत्र का गला घोंटने और अपराध सिंडिकेट खड़ा करने में लगा था। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले लोकसभा चुनाव में फलता विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल को मिली बड़ी बढ़त लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मजाक थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 वर्षों बाद लोगों को स्वतंत्र रूप से मतदान करने का मौका मिला और अब वास्तविक जनमत सामने आ गया है।
उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव में डायमंड हार्बर सीट के अंतर्गत आने वाले फलता विधानसभा क्षेत्र से अभिषेक बनर्जी को बड़ी बढ़त मिली थी। इस बार तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान को मात्र सात हजार 783 वोट मिले। शुभेंदु ने इसी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह तो केवल शुरुआत है और आने वाले समय में तृणमूल को “नोटा” के खिलाफ भी संघर्ष करना पड़ सकता है।
उन्होंने त्रिपुरा विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां तृणमूल को नोटा से भी कम वोट मिले थे और पश्चिम बंगाल में भी जनता ऐसा राजनीतिक संदेश दे सकती है।
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