कोलकाता देखने का सपना बना काल, तारातला हादसे में मामा-भांजे की मौत

कोलकाता, 27 जून (हि.स.)। कोलकाता के तरातला इमारत हादसे में मामा भांजे की मौत हो गई।

जानकारी के अनुसार भांजे साहिल के मन में काफी दिनों से थी। उसने अपने मामा से शहर की ऊंची इमारतों, दूर तक दिखाई देने वाले नजारों, फ्लैटों की कतार और हावड़ा ब्रिज की कहानियां सुनी थीं। तभी से उसने सपना देखा था कि एक दिन वह भी अपनी आंखों से कोलकाता देखेगा।

छुट्टियों में मामा के घर आने पर साहिल ने जिद की कि वह भी मामा के साथ जाएगा और किसी ऊंची छत से कोलकाता देखेगा। भांजे की इच्छा पूरी करने के लिए उसके मामा खालेक उसे अपने साथ तारातला स्थित निर्माणाधीन गोदाम में ले गए, जहां वह मजदूर के रूप में काम करते थे।

गत बुधवार को दोनों निर्माणाधीन गोदाम की छत पर पहुंचे ही थे कि अचानक हादसा हो गया। हादसे में चांगड़ टूटकर गिर गया और मौके पर ही साहिल की मौत हो गई। वहीं गंभीर रूप से घायल खालेक को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दो दिन तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद शनिवार दोपहर एसएसकेएम ट्रॉमा केयर में इलाज के दौरान उनकी भी मौत हो गई।

खालेक के भाई नूर आलम सरदार ने बताया कि खालेक पहले मुंबई में प्लंबर का काम करते थे। कोरोना काल के दौरान वह वापस लौट आए थे और बाद में तारातला के इस गोदाम में काम मिला था। साहिल कक्षा 10 का छात्र था और छुट्टियां बिताने बसंती स्थित मामा के घर आया था। कोलकाता देखने की इच्छा लेकर वह मामा के साथ तारातला पहुंचा था, लेकिन यह सफर उसकी जिंदगी का आखिरी सफर बन गया।

खालेक अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं। पति की मौत के बाद परिवार शोक में डूब गया है।

शनिवार को स्वास्थ्य मंत्री एवं चिकित्सक डॉ. शारद्वत मुखोपाध्याय एसएसकेएम अस्पताल पहुंचकर घायलों से मिले। उन्होंने बताया कि कई घायल अब स्वस्थ हो रहे हैं और उन्हें जल्द छुट्टी देने की प्रक्रिया चल रही है। पूर्व श्रम मंत्री अनादी साहू ने भी अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की।

तारातला हादसे में अब तक कुल 16 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं एसएसकेएम ट्रॉमा केयर में अभी भी दो लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है।

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