आसनसोल नगर निगम में इस्तीफों से सियासी भूचाल : तीन पार्षदों ने छोड़ा पद
- DSS Admin
- Jul 03, 2026
पश्चिम बर्दवान, 03 जुलाई (हि. स.)। आसनसोल नगर निगम में शुक्रवार का दिन पूरी तरह राजनीतिक हलचल के नाम रहा। एक के बाद एक तीन पार्षदों ने अपने पद से इस्तीफा देकर निगम की राजनीति में भूचाल ला दिया। वार्ड संख्या 78 के पार्षद अशोक रुद्र, वार्ड 72 के पार्षद एवं बोरो चेयरमैन चैतन्य माझी तथा वार्ड 84 के पार्षद डॉ. देवाशीष सरकार ने अपने-अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। चैतन्य माझी ने पार्षद पद के साथ बोरो चेयरमैन का पद भी छोड़ दिया, जबकि डॉ. देवाशीष सरकार पहले ही बोरो चेयरमैन पद से इस्तीफा दे चुके थे और अब उन्होंने पार्षद पद भी छोड़ दिया।
राजनीतिक रूप से सबसे अहम बयान वार्ड 78 के पार्षद अशोक रुद्र का रहा। उन्होंने कहा कि वे राजनीतिक दलों में लटकने वाले व्यक्ति नहीं हैं। उनके लिए आज भी ममता बनर्जी सम्मान और भावनाओं का विषय हैं, लेकिन 2021 के बाद से पार्टी का संचालन उनके हाथों में नहीं रहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि 2021 के बाद से ममता दीदी के हाथ में पार्टी नहीं थी। पार्टी पूरी तरह आईपैक के हाथों में चली गई थी। तृणमूल कांग्रेस एक राजनीतिक पार्टी थी, लेकिन धीरे-धीरे यह एक कॉरपोरेट संस्था में बदल गई। नीचे से लेकर ऊपर तक पंचायत प्रधान, नगर निगम पार्षद, विधायक और सांसद तक किसे टिकट मिलेगा और किसे जिम्मेदारी मिलेगी, इसका फैसला राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं बल्कि आईपैक करने लगा। पूरी पार्टी को एक कॉरपोरेट कार्यालय की तरह चलाया जाने लगा।
अशोक रुद्र ने कहा कि वे पार्षद पद से इसलिए इस्तीफा दे रहे हैं क्योंकि नई सरकार को जनता ने स्पष्ट जनादेश दिया है। जब सरकार बदल चुकी है तो उसे पूरी तरह काम करने का अवसर मिलना चाहिए। पार्षद के रूप में हमारे पास काम करने का कोई विकल्प नहीं बचा था। अधिकांश काम सीधे हो रहे थे और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप हम काम नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में लोकतांत्रिक जनादेश का सम्मान करते हुए पद छोड़ना ही उचित लगा।
उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व को भी आत्ममंथन करना चाहिए। 80 विधायक और 40 सांसद होने मात्र से संगठन नहीं चलता। पार्टी को यह सोचना होगा कि आखिर सात दिनों के भीतर ऐसा क्या हुआ कि संगठन बिखरने लगा। केवल बड़े-बड़े पद होने से काम नहीं चलता।
उन्होंने एक वरिष्ठ अधिवक्ता पर भी निशाना साधते हुए कहा कि हाई कोर्ट में बड़े-बड़े संवाद बोलने से कुछ नहीं होगा। पहले अपना राजनीतिक दिशा तय करिए। हमें जानकारी मिली है कि चुनाव के दौरान आप एक तरफ एसोसिएशन के साथ काम कर रहे थे और दूसरी तरफ दूसरे लोगों को सहयोग कर रहे थे। ऐसे में दूसरों को उपदेश देने से पहले स्वयं की भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए।
अशोक रुद्र ने भविष्य को लेकर भी चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि जो आज कुर्सी पर बैठा है, वह एक दिन जाएगा ही। लेकिन जाते-जाते ऐसा कुछ मत करिए कि इतिहास फिर खुद को दोहराने पर मजबूर हो जाए। जिसने अपराध किया है, उसे कानून के अनुसार सजा मिले, लेकिन सत्ता का उपयोग इस तरह नहीं होना चाहिए कि आने वाले समय में वही परिस्थितियां फिर लौट आएं।
वार्ड 84 के पार्षद डॉ. देवाशीष सरकार ने कहा कि उन्होंने जानबूझकर कुछ समय तक पद नहीं छोड़ा ताकि लोगों के आवश्यक प्रमाण-पत्रों और अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर का काम प्रभावित न हो। जब वह कार्य पूरा हो गया, तब उन्होंने इस्तीफा दिया।
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