तराई के जंगलों में बढ़ा वन्यजीवों का खतरा, अलर्ट मोड पर वन विभाग
- DSS Admin
- May 17, 2026
हल्द्वानी , 17 मई (हि.स.)। तराई का घना जंगल अब सिर्फ वन्यजीवों का सुरक्षित ठिकाना नहीं, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष का संवेदनशील केंद्र भी बनता जा रहा है। जंगलों से निकलकर आबादी की ओर बढ़ते टाइगर, गुलदार, भालू और हाथियों की गतिविधियों ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच वन विभाग अब पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है।
डीएफओ तराई पूर्वी हिमांशु बांगरी ने साफ कहा कि पूरा तराई क्षेत्र वाइल्ड लाइफ के दृष्टिकोण से बेहद समृद्ध और संवेदनशील बेल्ट है। यहां वन्यजीवों की अच्छी खासी आबादी है और जंगलों से लगे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग निवास करते हैं। कई बार ग्रामीण जंगलों में आवाजाही करते हैं, जिससे अचानक वन्यजीवों से आमना-सामना हो जाता है और हादसे हो जाते हैं।उन्होंने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए विभाग लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है। जहां कहीं वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों में दिखाई देते हैं, वहां तुरंत रेस्क्यू टीम भेजी जाती है।
हाल ही में विभाग ने जंगल किनारे रहने वाले लोगों को बड़ी संख्या में टॉर्च वितरित की हैं, ताकि रात के समय लोग सुरक्षित तरीके से आवाजाही कर सकें।डीएफओ बांगरी ने कहा कि जिन इलाकों में घटनाएं अधिक हो रही हैं, वहां जरूरत के अनुसार पिंजरे लगाए जा रहे हैं और वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। अब विभाग वैज्ञानिक तरीके से वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट पर काम कर रहा है। वन्यजीवों की काउंटिंग, मूवमेंट और व्यवहार का अध्ययन कर भविष्य की रणनीति तैयार की जा रही है। हाल ही में भालू के हमले में एक व्यक्ति की मौत की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संबंधित क्षेत्र में कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं।
विभाग यह जानने की कोशिश कर रहा है कि हमला करने वाला भालू कौन था और उसकी गतिविधियां किस क्षेत्र में हैं।विभाग ने यह भी माना कि खुले में फेंका जा रहा कूड़ा वन्यजीवों को आबादी की ओर आकर्षित कर रहा है। खासकर सिडकुल से लगे क्षेत्र में ऐसी स्थिति सामने आई है, जहां लोगों से कूड़ा सही तरीके से निस्तारित करने की अपील की गई है।डीएफओ ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि जंगल में कभी अकेले न जाएं, अंधेरे में टॉर्च का प्रयोग करें और चलते समय हल्की आवाज करते रहें, ताकि वन्यजीवों से अचानक सामना न हो।उन्होंने कहा कि जंगल वन्यजीवों का प्राकृतिक घर है, इसलिए इंसानों को भी वहां जाते समय पूरी सतर्कता और जिम्मेदारी दिखानी होगी।

