तारातला हादसे में फिरहाद के पीए ‘काली’ का नाम, मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार में भूमिका का लगाया आरोप

कोलकाता, 25 जून (हि. स.)। तारातला में निर्माणाधीन गोदाम ढहने की घटना को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता नगर निगम के एक अधिकारी काली का नाम लेते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि काली की सहमति के बिना कोलकाता नगर निगम में कोई भी भवन निर्माण योजना स्वीकृत नहीं होती थी।

मुख्यमंत्री ने तारातला हादसे में मृतकों के परिजनों के लिए राज्य सरकार की ओर से 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की। उन्होंने इस हादसे के लिए पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि नगर निगम में भवन निर्माण योजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोलकाता नगर निगम में काली की अनुमति के बिना कोई योजना स्वीकृत नहीं होती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि काली की नियुक्ति कैमैक स्ट्रीट (अभिषेक बनर्जी का कार्यालय) से की गई थी और वह बाइपास के किनारे तृणमूल के पार्टी कार्यालय के निर्माण कार्य से भी जुड़ा हुआ था। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इस निर्माण पर 200 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

काली का नाम पहली बार नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक विवाद के केंद्र में आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह पहले भूमि एवं भूमि राजस्व विभाग में कार्यरत था। इसके बाद वर्ष 2009 में उसने कोलकाता नगर निगम में उप प्रबंधक पद की परीक्षा दी और उसमें प्रथम स्थान प्राप्त किया।

परीक्षा में सफलता के बाद काली ने कोलकाता नगर निगम के 9-नंबर बोरो कार्यालय के सामाजिक क्षेत्र विभाग में कार्यभार संभाला। उस समय बोरो के अध्यक्ष तृणमूल नेता फिरहाद हकीम थे। इसी दौरान काली को फिरहाद हकीम का करीबी माना जाने लगा और नगर निगम में उसका प्रभाव बढ़ता गया।

वर्ष 2018 में फिरहाद हकीम के कोलकाता के मेयर बनने के बाद काली को विशेष कार्याधिकारी के पद पर नियुक्त किया गया। मुख्यमंत्री ने अब उसी पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया है कि नगर निगम में भवन निर्माण योजनाओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया में काली की प्रभावशाली भूमिका थी।

मुख्यमंत्री के आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। तारातला हादसे और भवन योजना स्वीकृति से जुड़े आरोपों की जांच जारी है।

   

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