यज्ञ और गुरु-शिष्य परंपरा से ही सच्चे ज्ञान की प्राप्ति संभव- स्वामी राम स्वरूप जी

True knowledge is attainable only through yajna and the guru-disciple tradition - Swami Ram Swarup Ji


कठुआ, 25 मई । वेद मंदिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 44वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी योगाचार्य ने जिज्ञासुओं को यज्ञ और वेद ज्ञान के महत्व पर विस्तार से उपदेश दिया।

उन्होंने कहा कि ऋग्वेद और यजुर्वेद में यज्ञ के हजारों गुण बताए गए हैं, इसलिए मनुष्य को सबसे पहले यज्ञ पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

यजुर्वेद मंत्र 1/30 की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि परमेश्वर सर्वव्यापक हैं जो समस्त सृष्टि को ऊर्जा और ज्ञान प्रदान करते हैं। स्वामी जी ने कहा कि संसार में जो भी सत्य ज्ञान है, वह वेदों से लिया गया है जबकि असत्य ज्ञान मनुष्य की कल्पना का परिणाम है। उन्होंने यह भी बताया कि सृष्टि के आरंभ में ईश्वर ने चार ऋषियों को प्रथम ज्ञान दिया और योग शास्त्र के अनुसार परमेश्वर ही उनके प्रथम गुरु बने। इसके बाद ब्रह्मा ऋषि द्वारा गुरु-शिष्य परंपरा का विस्तार हुआ।

उन्होंने जोर देकर कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा को सुदृढ़ कर वेदों का अध्ययन और आचरण करना ही जीवन का सच्चा मार्ग है। यज्ञ के माध्यम से ईश्वर की अनुभूति कर मनुष्य मोक्ष प्राप्त कर सकता है और जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो सकता है।

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