वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हिन्दू राष्ट्र का महत्व बढ़ना पूरे विश्व के लिये आदर्श : मनोज कांत
- DSS Admin
- May 29, 2026
लखनऊ, 29 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में राष्ट्रधर्म कार्यालय में आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि हिन्दू राष्ट्र विश्व के लिए कल्याणकारी है। यह समय की मांग भी है। इस गोष्ठी का विषय था- वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हिन्दू राष्ट्र । सभी वक्ताओं ने विषय पर ही अपने विचार व्यक्त किए।
राष्ट्रधर्म के निदेशक मनोजकांत ने कहा कि राष्ट्र प्राकृतिक रूप से विकसित होता है। उसे कोई बनाता नहीं है। पूरी दुनिया में भारत एकमात्र ऐसा स्थान है जहां मुसलमानों को शांति और स्वतंत्रता दोनों प्राप्त है। इसका मुख्य कारण यह है कि हमारी परम्परा में किसी के साथ भेदभाव नहीं किया गया। मनोजकांत ने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हिन्दू राष्ट्र का महत्व बढ़ गया है। यह पूरे विश्व के लिये आदर्श होगा।
गोष्ठी में अमित कुमार मल्ल ने कहा कि यह जरुरी है कि प्रत्येक भारतवासी माने कि हमारे पूर्वज एक हैं। इससे सबके बीच आत्मीयता उत्पन्न होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का सेक्युलरवाद क्रमशः हिन्दू विरोधी होता गया। पूर्व की केन्द्र सरकारों ने जान बूझकर हिन्दू धर्म का उपहास किया। उन्होंने प्रश्न किया कि आखिर धर्मांतरण का शिकार हमेशा हिन्दू लड़कियां ही क्यों होती हैं? जयप्रकाश पांडेय ने कहा कि समस्त लोकतांत्रिक संस्थाओं को, समाज को वैचारिक आक्रमण से बचाने की आवश्यकता है। बाबूलाल शर्मा ने कहा कि पश्चिमी और भारतीय चिंतन में अंतर है। आक्रमणकारियों का उद्देश्य राज्य का मजहबी विस्तार करना था। इस बात को हम लोग ठीक से समझ नहीं सके।
गोष्ठी का संचालन राष्ट्रधर्म के निदेशक डॉ. ओमप्रकाश ने किया। अध्यक्षता हरमेश चौहान ने की। गोष्ठी में गौसिया खानम, आलोक त्रिपाठी, मानवेंद्र पंकज, के के वत्स, राजीव द्विवेदी, संजीव सिंह, राजेंद्र शंकर द्विवेदी ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
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