संघ शिक्षा वर्ग व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला : डॉ. शैलेंद्र
- DSS Admin
- Jun 12, 2026

- हरिद्वार में संघ शिक्षा वर्ग का हुआ समापन- भारत विश्वगुरु था, है और रहेगा: ले.अजय
हरिद्वार, 12 जून (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तराखंड प्रांत का 14 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग (विद्यार्थी) शुक्रवार को सरस्वती विद्या मंदिर, सेक्टर-2, भेल में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हो गया।
समारोह के मुख्य अतिथि ले. जनरल अजय कुमार सिंह ने कहा कि राष्ट्र को बाहर की ताकतों के साथ साथ अंदर बैैैठे राष्ट्रद्रोहियों से भी खतरा है। ऐसे में हमें हमेशा हर स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार रहना पड़ेगा। उन्होंने संघ के स्वयंसेवकों से कहा कि अनुशासन के बगैर कुछ हासिल नहीं किया जा सकता। राष्ट्र के प्रति आपकी समर्पण की भावना, राष्ट्र के प्रति आपका प्रेम अत्यंत आवश्यक है। आज के माहौल में अपनी सांस्कृतिक विरासत को संभाल के रखने के सााथ जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में राष्ट्र प्रथम का भाव अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारत विश्व गुरु था नहीं बल्कि भारत आज भी विश्व गुरु है और हमेशा विश्व गुरु रहेगा लेकिन यह तब संभव है जब हम अपनी सांस्कृतिक विरासत के साथ जुड़ें, उसको पहचाने और अपनी दिनचर्या मे शामिल करें।
विशिष्ट अतिथि उद्यमी संदीप जैन ने कहा कि राष्ट्र का निर्माण होगा तो सभी का निर्माण होगा और संघ इसी कार्य में लगा है कि कैसे राष्ट्र का निर्माण हो, हर एक भारतीय में राष्ट्रीयता की भावना हो, देशभक्ति की भावना हो।
मुख्य वक्ता प्रान्त प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र ने कि समाज में सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध और नागरिक कर्तव्य के पंच परिवर्तन से ही भारत परम वैभव को प्राप्त करेगा। संघ का कार्य समाज को जोड़ना और संगठित शक्ति के माध्यम से राष्ट्र का उत्थान करना है। उन्होंने बताया कि संघ शिक्षा वर्ग व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला है। यहां 20 दिन की कठोर दिनचर्या, शारीरिक और बौद्धिक प्रशिक्षण के बाद स्वयंसेवक समाज में राष्ट्र कार्य के लिए पूर्ण रूप से समर्पित होता है।
उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व में नई पहचान बना रहा है। जी-20 की अध्यक्षता, चंद्रयान की सफलता और आर्थिक प्रगति से दुनिया भारत की ओर देख रही है। परंतु यह बाहरी पहचान तभी सार्थक होगी जब हम समाज के भीतर व्याप्त कुरीतियों को दूर करेंगे। छुआछूत, ऊंच-नीच, जातिगत भेदभाव से मुक्त समरस समाज बनाना होगा। पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होना होगा। प्रत्येक घर में बच्चों को संस्कार और परिवार में संवाद की परंपरा को जीवित रखना होगा। उन्होंने आह्वान किया कि वर्ग से निकलने के बाद प्रत्येक शिक्षार्थी अपने गांव या मोहल्ले में एक सामाजिक कार्य की जिम्मेदारी ले। स्वच्छता, शिक्षा या स्वास्थ्य किसी एक क्षेत्र में काम शुरू करे।
समारोह में शिक्षार्थियों ने दंड युद्ध, नियुद्ध, योगासन, सूर्य नमस्कार और सामूहिक समता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
वर्ग सर्वव्यावस्था प्रमुख वीर प्रताप ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस 15 दिवसीय वर्ग में उत्तराखंड के 13 जिलों से कुल 306 शिक्षार्थी शामिल हुए। कुल 40 घंटे शारीरिक प्रशिक्षण और 60 घंटे बौद्धिक सत्रों का आयोजन हुआ।
बौद्धिक सत्रों में संघ का इतिहास, भारतीय संस्कृति, वर्तमान चुनौतियां और पंच परिवर्तन विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने वर्ग के सफल आयोजन के लिए भेल प्रबंधन, विद्यालय परिवार एवं हरिद्वार के नागरिकों का आभार जताया।
मंचासीन लोगों में जिला संघचालक डॉ. यतींद्र नाग्यान तथा वर्गाधिकारी प्रवीण कुमार उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में प्रान्त सह प्रचारक चंद्रशेखर जी,विभाग पालक सुनील जी,विभाग प्रचारक राकेशजी सहित अनेक गणमान्य नागरिक, उद्योगपति और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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