ऊना, 03 जुलाई (हि.स.)। माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर के लिए प्रस्तावित रोपवे योजना का स्थानीय व्यापार मंडल ने कड़ा विरोध किया है। एडीबी ब्लॉक से लेकर मंदिर तक बनाए जाने वाले इस करीब 400 से 500 मीटर लंबे रोपवे के सर्वे के लिए शुक्रवार को एक टीम चिंतपूर्णी पहुंची थी। इस दौरान स्थानीय व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों ने सर्वे टीम से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां दर्ज करवाईं और इस योजना को तुरंत रोकने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में लीगल एडवाइजर एडवोकेट रवि पराशर, निरंजन कालिया, संजीव शर्मा, महावीर कालिया, विक्रांत सूद और बाल कुंदन गर्ग सहित कई अन्य व्यापारी शामिल थे।
व्यापारियों का कहना है कि यह रोपवे मुख्य बाजार के ऊपर से गुजरते हुए मंदिर की पहाड़ी तक जाएगा, जो कि एक कच्ची पहाड़ी है। इतनी भारी मशीनरी और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ का वजन यह पहाड़ी सहन कर पाएगी या नहीं, यह एक बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय है। इसके अलावा, व्यापारियों ने इस परियोजना से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि इसी पहाड़ी पर हजारों वर्ष पूर्व बाबा माई दास जी ने तपस्या की थी और उन्हें स्वप्न में प्राचीन वट वृक्ष के नीचे पिंडी रूप में मां के विराजमान होने का पता चला था। देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक वट वृक्ष पर मौली बांधकर मन्नतें मांगते हैं और पूरी होने पर उसे खोलते हैं। व्यापारियों को डर है कि रोपवे निर्माण से इस प्राचीन वट वृक्ष और मंदिर के वर्तमान स्वरूप को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचेगी।
व्यापार मंडल ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन को रोपवे का निर्माण करना ही है, तो इसे भरवाईं या किन्नू राष्ट्रीय राजमार्ग पर किसी अन्य स्थान से एडीबी ब्लॉक तक लगाया जाए, जिस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। वर्तमान योजना के अनुसार मंदिर के पास वाले तंग क्षेत्र में रोपवे बनने से वहां भीड़ का दबाव और अधिक बढ़ जाएगा, जिससे किसी भी अनहोनी या दुर्घटना की आशंका बनी रहेगी।
व्यापारियों का मानना है कि इस समय सबसे बड़ी जरूरत मंदिर परिसर को खुला करने की है, जिसके लिए सरकार पहले ही भूमि का अधिग्रहण कर चुकी है। उन्होंने मांग की है कि शिरडी, तिरुपति बालाजी और वैष्णो देवी की तर्ज पर यहां भी बड़े हॉलों का निर्माण किया जाए ताकि भीड़ को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सके। मंदिर अधिग्रहण के बाद से इसके मुख्य परिसर में कोई विस्तार नहीं हुआ है।
व्यापारियों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि केंद्र सरकार की 'प्रसाद योजना' के तहत मिली रकम का उपयोग मुख्य रूप से मंदिर परिसर को बड़ा करने के लिए किया जाए और जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस रोपवे के काम को तुरंत प्रभाव से रोका जाए।
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