उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन 10 जुलाई को शिमला में करेंगे अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन

शिमला, 06 जुलाई (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन 10 जुलाई को शिमला स्थित भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस) में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर वह ‘वंदे मातरम् : एक यात्रा’ प्रदर्शनी का भी शुभारंभ करेंगे। राष्ट्रपति निवास परिसर में 10 से 12 जुलाई तक आयोजित होने वाली इस संगोष्ठी का विषय ‘सरदार पटेल की दृष्टि : एकीकरण, एकात्मता और संघवाद’ रखा गया है।

संस्थान के अनुसार संगोष्ठी का उद्देश्य भारत के राजनीतिक एकीकरण में सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान और उनके संवैधानिक, प्रशासनिक तथा राजनीतिक विचारों पर व्यापक अकादमिक चर्चा करना है। कार्यक्रम में यह भी विचार होगा कि वर्तमान समय में राष्ट्रीय एकता, सहकारी संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध, सुशासन, प्रशासनिक व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में सरदार पटेल की सोच कितनी प्रासंगिक है।

तीन दिन तक चलने वाली संगोष्ठी में इतिहास, राजनीति विज्ञान, संविधान, समाजशास्त्र, लोक प्रशासन, कानून, राष्ट्रीय सुरक्षा और मीडिया से जुड़े विशेषज्ञ भाग लेंगे। चर्चा केवल देशी रियासतों के एकीकरण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भारतीय संघीय व्यवस्था, अखिल भारतीय सेवाओं, प्रशासनिक संस्थाओं, राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे और संवैधानिक लोकतंत्र के विकास में सरदार पटेल की भूमिका पर भी विस्तार से विचार किया जाएगा। साथ ही दुनिया के विभिन्न देशों में संघवाद और राष्ट्र-निर्माण के अनुभवों पर भी चर्चा होगी।

संगोष्ठी में देश और विदेश के कई प्रतिष्ठित विद्वान शामिल होंगे। इतिहासकार गीता धर्मपाल ऑनलाइन माध्यम से सरदार पटेल के गांधीवादी दृष्टिकोण पर व्याख्यान देंगी। लावण्या वेंमसानी हैदराबाद राज्य के भारत में विलय पर अपने विचार रखेंगी। वहीं कुन्दन सिंह 'श्री अरविंद और सरदार पटेल' विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान देंगे। कार्यक्रम में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, सिक्किम विश्वविद्यालय समेत भारत और विदेश के कई विश्वविद्यालयों तथा शोध संस्थानों के विशेषज्ञ भाग लेंगे।

उद्घाटन समारोह में कई अकादमिक प्रकाशनों का भी विमोचन किया जाएगा। इनमें ‘वंदे मातरम् : एक यात्रा’ पर आधारित कॉफी टेबल पुस्तक, ‘ईटरनल राधाकृष्णन : दर्शन, कालबोध और व्यक्तित्व’ विषय पर संगोष्ठी कार्यवाही तथा डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को समर्पित बहुभाषी कविता संग्रह शामिल हैं। इसी अवसर पर लगाई जा रही ‘वंदे मातरम् : एक यात्रा’ प्रदर्शनी में राष्ट्रीय गीत के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका और राष्ट्रीय चेतना के विकास में उसके योगदान को प्रस्तुत किया जाएगा।

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