बंगाल सरकार कानूनी पैनल में करेगी बड़ा बदलाव, मुख्यमंत्री ने दिए प्रभावी पैरवी के निर्देश

कोलकाता, 03 जुलाई (हि.स.)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार राज्य के सरकारी अधिवक्ताओं और लोक अभियोजकों के पैनल में व्यापक बदलाव की तैयारी कर रही है। सरकार का उद्देश्य बाहरी वरिष्ठ अधिवक्ताओं पर निर्भरता कम करना और सरकारी मामलों की प्रभावी पैरवी के लिए अपने कानूनी तंत्र को मजबूत बनाना है, जिससे सरकारी खजाने पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ को भी कम किया जा सके।

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के वर्तमान सरकारी अधिवक्ताओं और लोक अभियोजकों के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायालयों में सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता मामलों की अधिक प्रभावी और तथ्यपूर्ण पैरवी करें, ताकि भविष्य में महंगे बाहरी वरिष्ठ अधिवक्ताओं की सेवाएं लेने की आवश्यकता कम हो।

बैठक में मुख्यमंत्री ने मौजूदा कानूनी पैनल की कमजोरियों की पहचान करने और आवश्यकता पड़ने पर उसमें व्यापक बदलाव करने की प्रक्रिया शुरू करने का भी सुझाव दिया। उनका मानना है कि राज्य के अपने अधिवक्ताओं की क्षमता बढ़ाकर सरकार कानूनी मामलों में बेहतर परिणाम हासिल कर सकती है।

बैठक में मौजूद एक लोक अभियोजक के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में सरकारी मामलों में लगातार बाहरी वरिष्ठ अधिवक्ताओं को नियुक्त करना एक सामान्य प्रक्रिया बन गई थी, क्योंकि राज्य सरकार के पैनल के अधिवक्ताओं की पैरवी वाले कई मामलों में सरकार को अदालतों में लगातार पराजय का सामना करना पड़ा।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से कलकत्ता उच्च न्यायालय में राज्य सरकार का पक्ष रखने वाले अधिवक्ताओं के पैनल को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई बार सरकारी अधिवक्ताओं और लोक अभियोजकों को मामलों की सुनवाई के दौरान पुलिस तथा विभिन्न सरकारी विभागों से आवश्यक दस्तावेज और सूचनाएं समय पर नहीं मिल पाती हैं, जिससे प्रभावी पैरवी प्रभावित होती है।

मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि सभी सरकारी विभागों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि सरकारी अधिवक्ताओं को समय पर दस्तावेज और अन्य जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी विभाग से सहयोग नहीं मिलता है तो संबंधित अधिवक्ता सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।-----------------

   

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