अक्षय नवमी पर आंवला के वृक्ष का पूजन, श्री हरि की आराधना
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- Oct 30, 2025
श्री हरि को भोग लगाने के बाद लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया
वाराणसी, 30 अक्टूबर (हि.स.)। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अक्षय नवमी (नवमी) पर गुरूवार को उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में श्रद्धालुओं ने विधि विधान से परम्परानुसार आंवला के वृक्ष का पूजन किया। श्रीहरि की आराधना को समर्पित अक्षय नवमी पर लोगों ने वृक्ष के पास बैठकर प्रसाद भी ग्रहण किया।
इसी क्रम में असि स्थित गोयनका संस्कृत विद्यालय परिसर में स्थित आंवले के पेड़ के नीचे जागृति फाउंडेशन के पहल पर जुटे विशिष्ट जनों ने आंवला के वृक्ष की पूजा कर आरती उतारी। मुख्य अतिथि लोक भूषण सम्मान से सम्मानित साहित्यकार डॉ जयप्रकाश मिश्र, विशिष्ट अतिथि स्वदेशी जागरण मंच की काशी महानगर की संयोजिका कविता मालवीय ने भी इसमें भागीदारी की।
इस अवसर पर साहित्यकार डॉ. जयप्रकाश मिश्रा ने कहा कि अक्षय नवमी के दिन जो भी कार्य किया जाता है वह अजर अमर हो जाता है । इसलिए आज के दिन हमें अच्छे कार्य करने चाहिए। कविता मालवीय ने कहा कि आंवले का वृक्ष भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप माना जाता है। आज के दिन इनका पूजन करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
कार्यक्रम के संयोजक रामयश मिश्र ने कहा कि आज अक्षय नवमी का दिन पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है। सनातन संस्कृति में हमारे ऋषि मुनियों ने पर्यावरण, पेड़, प्रकृति, नदी, जल को भी भगवान का स्वरूप माना है। हमें इसे बचाने के लिए आगे आना होगा। कार्यक्रम में जाह्नवी सिंह, योगाचार्य विनय कुमार मिश्रा, सत्यांशु जोशी, विवेक त्रिपाठी आदि ने भागीदारी की।
उल्लेखनीय है कि दिव्य कार्तिक मास श्रीहरि की आराधना को समर्पित माना जाता है। इस माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी कहा जाता है। इस दिन आंवले के वृक्ष का पूजन कर खानपान का विधान है। पर्व पर गंगा स्नान और अन्नदान के साथ आंवला के वृक्ष के नीचे भोजन करने से अनंत फल प्राप्त होता है। माना जाता है कि इस दिन दिया दान पूर्ण अक्षय हो जाता है। आंवले का वृक्ष भगवान विष्णु को प्रिय है। मान्यता है कि इस दिन द्वापर युग का आरंभ हुआ था। आयुर्वेद के अनुसार भी आंवला सेहत के लिए वरदान है। इसके नियमित सेवन से आयु बढ़ती है और बीमारियों से रक्षा होती है। पीपल, तुलसी की तरह ही आंवला भी पूजनीय और पवित्र माना गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी



