किशोरों को स्वस्थ, अनुशासित और सकारात्मक जीवन की दिशा देता है योग : डॉ. नीरजा दुबे

कानपुर, 18 जून (हि.स.)। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, अनुशासित और सकारात्मक बनाने की वैज्ञानिक जीवन-पद्धति है। किशोरावस्था व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण दौर है, जिसमें सही मार्गदर्शन और स्वस्थ आदतें जीवन की दिशा तय करती हैं। नियमित योगाभ्यास से एकाग्रता, आत्मविश्वास, मानसिक संतुलन और भावनात्मक स्थिरता का विकास होता है। युवाओं को नशामुक्त, अनुशासित और स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए तथा योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। यह बातें गुरुवार को नीमा की अध्यक्षा डॉ. नीरजा दुबे ने कहीं।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के उपलक्ष्य में नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) द्वारा आयोजित योग पखवाड़ा के चौथे दिन कल्याणपुर स्थित राजकीय बालगृह, आरोग्य क्लिनिक लाल बंगला तथा राजकीय बालिका गृह स्वरूप नगर में दो दिवसीय योग एवं स्वास्थ्य जागरूकता शिविर का समापन हुआ। वैदिक परंपरा के अनुसार पुष्य नक्षत्र में 180 बच्चों का स्वर्ण प्राशन संस्कार भी कराया गया।

नीमा वूमेन फोरम उत्तर प्रदेश की सचिव डॉ. वंदना पाठक ने स्वर्ण प्राशन संस्कार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आयुर्वेद में इसे स्मरण शक्ति, रोग प्रतिरोधक क्षमता, मानसिक विकास और बौद्धिक क्षमता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है। उन्होंने बताया कि योग पखवाड़े का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक स्वास्थ्य, योग और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश पहुंचाना है।

योग शिक्षक डॉ. रामकिशोर ने प्रतिभागियों को ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, वृक्षासन, नटराजासन, उद्धान मंडूकासन और शशांकासन का अभ्यास कराया तथा इनके लाभ बताए। वहीं योग शिक्षिका सोनाली धनवानी ने डीप ब्रीदिंग, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम सहित विभिन्न मानसिक एवं बौद्धिक सक्रियता बढ़ाने वाले अभ्यास कराए। कार्यक्रम में डॉ. अनुराग मिश्रा, ऊषा देवी, संदीप गुप्ता, वंशिका और सारवी उपस्थित रहे। अंत में प्रतिभागियों ने योग को दैनिक जीवन में अपनाने और स्वस्थ जीवनशैली का संकल्प लिया।

   

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