अमृतसर में तीन साल से अधूरा पुल, फूटा गुस्सा:लोगों ने किया प्रदर्शन, हर समय जाम से जूझते लोग, शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं

अमृतसर के एयरपोर्ट रोड को जोड़ने वाला वल्ला पुल पिछले लगभग तीन वर्षों से अधूरा पड़ा है, जो अब स्थानीय निवासियों और राहगीरों के लिए एक बड़ी जी का जंजाल बन चुका है। प्रशासन की इसी ढुलमुल कार्यप्रणाली के विरोध में आज इलाके के लोगों, ग्रामीणों और पूर्व पार्षद मलकीत सिंह वल्ला के नेतृत्व में जोरदार धरना प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने पंजाब सरकार और संबंधित विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने मांग की कि वल्ला पुल का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर पूरा कर इसे जल्द से जल्द आम जनता की आवाजाही के लिए खोला जाए। भारी ट्रैफिक और सब्जी मंडी के कारण हर वक्त लगता है जाम प्रदर्शनकारियों ने बताया कि यह सड़क बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे तौर पर एयरपोर्ट, चंडीगढ़ रोड और दर्जनों गांवों को आपस में जोड़ती है। इसके अलावा, पास में ही मुख्य सब्जी मंडी होने के कारण यहाँ चौबीसों घंटे भारी वाहनों और आम जनता का ट्रैफिक रहता है। पुल के अधूरा होने से यहाँ रोजाना लंबा ट्रैफिक जाम लगता है, जिससे लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है। एंबुलेंस का निकलना मुश्किल, अधूरे पुल ने ली कई जानें ग्रामीणों ने बेहद भावुक और गुस्से में बताया कि इस भारी जाम के कारण अक्सर आपातकालीन एंबुलेंस गाड़ियां भी घंटों फंसी रहती हैं, जिससे गंभीर मरीजों की जान पर बन आती है। स्थानीय निवासियों और ग्रामीणों का दावा है कि इस अधूरे पुल की वजह से पिछले तीन सालों में कई भयानक सड़क हादसे हो चुके हैं, जिनमें कुछ लोग अपनी कीमती जान भी गंवा चुके हैं। "सिर्फ मिलते हैं खोखले आश्वासन, कुछ दिन में भाग जाते हैं मजदूर" धरने की अगुवाई कर रहे पूर्व पार्षद मलकीत सिंह वल्ला ने कहा कि पुल को चालू करवाने के लिए हम पहले भी कई बार धरने और संघर्ष कर चुके हैं, लेकिन सरकार की ओर से हमें सिर्फ खोखले आश्वासन ही मिले हैं। अधिकारी इस मामले को बिल्कुल गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। कभी-कभार कुछ दिनों के लिए काम शुरू किया जाता है और फिर अचानक मजदूर साइट छोड़कर चले जाते हैं।" "शौक से नहीं, मजबूरी में उतरे हैं सड़क पर" गांव के नंबरदार सुखराज सिंह बल्ला ने कहा कि लोगों को सड़कों पर बैठकर धरना देने का कोई शौक नहीं है। लेकिन जब सरकार और प्रशासन आँखें मूंदकर बैठ जाएं, तो जनता को अपने हक के लिए मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह अधूरा पुल अब एक 'डेथ ट्रैप' (मौत का कुआं) बन चुका है और अगर इसे जल्द पूरा नहीं किया गया तो संघर्ष और तेज होगा।

   

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