चेरिटेबल अस्पताल में मरीजों की सेवा की अरदास

जालंधर| अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर डॉ. यूएस घई और ए घई की उपस्थिति में समागम हुआ। इसमें डॉ. मैट्टा, डॉ. एचएल कमल, डॉ. सांडली, डॉ. एचएस भुटानी, कर्नल जोसेफ माल और डॉ. अग्निहोत्री मौजूद रहे। इस दौरान उत्कृष्ट कार्य और समर्पण के लिए दो स्टाफ सदस्यों को स्टार परफॉर्मर पुरस्कार दिया गया। समारोह में कर्मचारियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, लघु नाटिकाएं और नृत्य कार्यक्रम प्रस्तुत किए। जालंधर | गुरु तेग बहादुर चेरिटेबल अस्पताल में नर्सेस डे मनाया गया। गुरुद्वारा कमेटी और अस्पताल के प्रधान कंवलजीत सिंह ओबराय ने नर्सिंग स्टाफ द्वारा मरीजों की सेवा पूरी तनदेही के साथ करते रहने की अरदास की। यहां मनजीत सिंह ठुकराल, परमजीत सिंह कानपुरी और हरजिंदर सिंह मौजूद थे। भास्कर न्यूज | जालंधर शहीद बाबू लाभ सिंह मेमोरियल सिविल अस्पताल में मंगलवार को ‘इंटरनेशनल नर्सेज डे’ के उपलक्ष्य में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. नमिता घई की देखरेख में आयोजित इस समारोह में सिविल सर्जन डॉ. राजेश गर्ग मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सिविल सर्जन डॉ. राजेश गर्ग ने कहा कि नर्सिंग में करियर से बड़ा कर्तव्य होता है। यहां डिग्री से बड़ा दिल होता है। जब कोई मरीज इलाज के लिए आता है तो डॉक्टर तो सिर्फ निर्देश लिखता है लेकिन मरीजों की जिंदगी इन नर्सों के सहारे ​ही चलती है। उन्होंने इस वर्ष नर्स डे की थीम पर बात करते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य नर्सों को सुरक्षित कार्य वातावरण और नेतृत्व की शक्ति प्रदान करना है, ताकि वे अपनी पूरी क्षमता से जीवन बचाने के मिशन में योगदान दे सकें। डॉ. गर्ग ने नर्सिंग स्टाफ को पूरी लगन और जुनून के साथ मानवता की सेवा करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान डॉ. नमिता घई ने नर्सों के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉक्टर मरीजों का इलाज करते हैं, लेकिन उन्हें स्वस्थ बनाने में नर्सों की देखभाल सबसे कीमती होती है। उन्होंने नर्सों को फ्लोरेंस नाइटिंगेल की जीवनी से सीख लेने के लिए प्रोत्साहित किया। जिला परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. वनिंदर रियार ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि नर्सिंग स्टाफ के बिना स्वास्थ्य सेवाओं की कल्पना करना असंभव है। नर्सें समाज, अर्थव्यवस्था और संस्कृति पर गहरा प्रभाव डालती हैं। इस अवसर पर एसएमओ डॉ. वरिंदर कौर, एसएमओ डॉ. हरवीन कौर, मैट्रन जसवीर कौर और नर्सिंग सिस्टर अनीता आदि विशेष रूप से मौजूद रहे। असीम धैर्य: विपरीत परिस्थितियों और कठिन स्वभाव के मरीजों के बीच भी नर्सें शांत रहकर अपना काम करती हैं। यह सिखाता है कि मानसिक संतुलन खोए बिना संकट का सामना कैसे करें। निस्वार्थ सेवा : बिना किसी भेदभाव के अनजान लोगों के दर्द को अपना समझना और उनकी सेवा करना हमें सच्ची सहानुभूति और मानवता की सीख देता है। समय प्रबंधन और अनुशासन : जीवन और मृत्यु के बीच के संघर्ष में हर सेकंड कीमती होता है। नर्सों की तत्परता हमें समय की कद्र करना और दबाव में भी सटीक निर्णय लेना सिखाती है।

   

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