पठानकोट में 700 से अधिक केमिस्ट शॉप्स रही बंद:सलारिया चौक में धरना लगाकर सरकार के खिलाफ की नारेबाजी, संघर्ष तेज करने की चेतावनी

ऑनलाइन दवाओं की बिक्री यानी ई-फार्मेसी के खिलाफ देशभर के केमिस्टों ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर देशव्यापी केमिस्ट हड़ताल के चलते पठानकोट में 500 से अधिक रिटेलर और 200 से अधिक होलसेल मेडिकल शॉप्स बंद रहीं। हालांकि, इस दौरान, सिविल अस्पताल समेत शहर के 3 प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र और निजी अस्पतालों के मेडिकल स्टोर खुले रहे। जिससे लोगों को कोई खास परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। दवाएं कोई सामान्य वस्तु नहीं जिला होलसेल एंड रिटेल केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश महाजन बब्बा एवं महासचिव दीपेंद्र अरोड़ा ने कहा कि दवाएं कोई सामान्य वस्तु नहीं हैं, यह सीधे मरीज की जिंदगी से जुड़ी हैं। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के अनुसार दवाएं योग्य डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन और फार्मासिस्ट के माध्यम से ही मिलनी चाहिए, लेकिन ऑनलाइन फार्मेसी इन नियमों का उल्लंघन कर रही हैं। गुणवत्ता पर सवाल भी उठते रहे हैं सवाल वक्ताओं ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दवाओं की गुणवत्ता जांचने का कोई विश्वसनीय सिस्टम नहीं है, जिससे नकली और सब-स्टैंडर्ड दवाओं का खतरा बढ़ रहा है। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं की बिक्री से नशे और दुरुपयोग को बढ़ावा मिल रहा है। बताया कि हड़ताल 20 मई की आधी रात तक चलेगी। जिले के 500 रिटेलर और 200 होलसेलर इसमें शामिल होंगे। केमिस्टों के संघर्ष को व्यापार मंडल का पूर्ण समर्थन धरने को संबोधित करते हुए एल.आर. सोढी ने स्थानीय दवा व्यापारियों की मांगों को जायज ठहराया। उन्होंने कहा कि व्यापार मंडल इस संघर्ष में केमिस्टों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। हम ई-फार्मेसी और बड़े कॉर्पोरेट घरानों की एकाधिकारवादी नीतियों का कड़ा विरोध करते हैं। सरकार को तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और स्थानीय दुकानदारों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। देशभर में 24 घंटे की हड़ताल, 12.5 लाख केमिस्ट शामिल एसोसिएशन के पदाधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह देशव्यापी हड़ताल 24 घंटे के लिए बुलाई गई है। बताया गया कि यह हड़ताल 19 मई की आधी रात से शुरू होकर 20 मई की आधी रात तक जारी रहेगी। इस विरोध प्रदर्शन में देशभर के लगभग 12.5 लाख केमिस्ट शामिल होकर अपना रोष दर्ज करा रहे हैं। केमिस्टों की चिंताएं: ई-फार्मेसी से नुकसान गलत दवा उपयोग का खतरा: ऑनलाइन खरीद में मरीज को फार्मासिस्ट की व्यक्तिगत सलाह नहीं मिलती, जिससे गलत दवा लेने का खतरा रहता है। बिना पूरी जानकारी के खरीदी गई दवाएं गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती हैं। बाजार पर कब्जा: ई-फार्मेसी कंपनियां भारी छूट देकर बाजार पर कब्जा करना चाहती हैं, जिससे छोटे व्यापारियों का काम प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही दवाओं की वैधता और स्टोरेज संबंधी मानकों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकार से मांग: पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि ऑनलाइन दवाओं की अवैध बिक्री पर तुरंत सख्त रोक लगाई जाए और मौजूदा कानूनों को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए।

   

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