आयुर्वेद विश्वविद्यालय व आत्मन फाउंडेशन लखनऊ के बीच हुआ एमओयू

नवाचार आधारित शिक्षा से आयुर्वेद के भविष्य को मिलेगा नया आयाम: कुलगुरु

जोधपुर, 15 जून (हि.स.)। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल की उपस्थिति में सेंटर फॉर ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट द्वारा एवं आत्मन फाउंडेशन लखनऊ के सहयोग से विश्वविद्यालय सुश्रुत सभागार में एक दिवसीय फैकल्टी लीडरशिप एवं आयुर्वेद कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान आयुर्वेद विश्वविद्यालय एवं आत्मन फाउंडेशन लखनऊ के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए गए।

अपने संदेश में कुलगुरु ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षकों की भूमिका केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें नेतृत्वकर्ता, मार्गदर्शक एवं परिवर्तन के वाहक के रूप में भी कार्य करना होता है। नेतृत्व कौशल से युक्त शिक्षक ही विद्यार्थियों और संस्थानों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।

कार्यशाला में आत्मन फाउंडेशन लखनऊ के संस्थापक शशांक श्रीवास्तव ने नेतृत्व विकास, आत्मप्रेरणा तथा शिक्षकों की सामाजिक एवं संस्थागत भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। विशिष्ट वक्ता के रूप में डॉ. अनुपम श्रीवास्तव ने आयुर्वेद शिक्षा, अनुसंधान तथा आयुष क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में रमन मित्तल ने आयुर्वेद औषधि उद्योग, गुणवत्ता मानकों तथा आयुर्वेद आधारित नवाचारों पर व्याख्यान दिया। इस अवसर पर प्राचार्य पीजीआईए प्रो चंदन सिंह, प्रो महेंद्र कुमार शर्मा, प्रो ए नीलिमा रेड्डी, डॉ गौरव नागर, डॉ श्योराम शर्मा, मीडिया प्रभारी प्रो दिनेश चंद्र शर्मा, प्रो हरीश कुमार सिंघल, संकाय सदस्य एवं स्नातक एवं स्नातकोत्तर अध्येता उपस्थित रहे।

   

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